रेलवे की पटरियों से ट्रेन के कोच तक, खतरनाक रीलबाजी और मोबाइल के शोर पर बड़ा एक्शन ! जेल तक की नौबत ₹5,000 जुर्माना?
गोंदिया - वैश्विक स्तरपर डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने की होड़ ने मनोरंजन की दुनियाँ को जितना व्यापक बनाया है,उतना ही गंभीर सवाल सार्वजनिक सुरक्षा और नागरिक जिम्मेदारी को लेकर भी खड़ा किया है।कुछ सेकंड की रील,हजारों व्यूज और सोशल मीडिया पर वायरल होने की चाह में अनेक युवा ऐसे वीडियो बनाने की कोशिश करते हैं, जिनमें चलती ट्रेन के दरवाजे पर खड़े होना, रेलगाड़ी से बाहर झूलना,रेलवे ट्रैक के आसपास खतरनाक गतिविधियां करना अथवा स्टेशन परिसर में जोखिम भरे दृश्य फिल्माना शामिल होता है।दूसरी ओर, रेलगाड़ियों के भीतर मोबाइल फोन के स्पीकर पर तेज आवाज में रील, गाने और वीडियो चलाना भी यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बनता है।इन दोनों समस्याओं की प्रकृति अलग है,लेकिन इनके केंद्र में सार्वजनिक सुरक्षा, अनुशासन और दूसरे यात्रियों के अधिकारों का सम्मान करने का सवाल है। भारतीय रेलवे ने अब मोबाइल पर तेज आवाज से होने वाले उपद्रव के विरुद्ध भी सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र बताना चाहूंगा क़ि 19 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार 19 अक्टूबर 2026: रेलवे का नया अलर्ट क्यों है महत्वपूर्ण?,रेलवे के विभिन्न जोनों ने यात्रियों को मोबाइल फोन पर तेज आवाज में संगीत और वीडियो चलाने से रोकने के लिए जागरूकता तथा प्रवर्तन संबंधी कदम उठाने की तैयारी की है। दक्षिण रेलवे ने 6 अक्टूबर 2026 के एक सर्कुलर के माध्यम से अपने मंडलों को निर्देश दिया कि ट्रेनों और रेलवे परिसर में स्पीकर मोड पर संगीत अथवा वीडियो चलाने तथा जोर-जोर से बातचीत करने से होने वाली परेशानी के प्रति यात्रियों को जागरूक किया जाए। रिपोर्ट में उत्तर रेलवे और पश्चिम रेलवे की ओर से भी ऐसी गतिविधियों पर कार्रवाई करने के प्रयासों का उल्लेख है। स्टेशनों पर सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली, सूचना संदेश और संबंधित रेल कर्मचारियों के माध्यम से यात्रियों को नियमों का पालन करने के लिए सचेत करना इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट को पूरे देश में एक ही दिन जारी हुए किसी एक नए रेलवे बोर्ड आदेश का प्रमाण मानने के बजाय संबंधित जोनों की कार्रवाई के संदर्भ में पढ़ना सटीकता से अधिक उचित होगा।
साथियों बात अगर हम आधिकारिक गैजेट और सर्कुलर जारी होने की तारीखों को समझने की करें तो इस नई नियमावली का मुख्य आधार जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम, 2026 है। इस अधिनियम को महामहिम राष्ट्रपति द्वारा 7 अप्रैल, 2026 को मंजूरी दी गई थी और 8 अप्रैल, 2026 को इसे भारत के आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित किया गया था। इसके बाद, रेलवे बोर्ड ने 23 जून,2026 को आधिकारिक सर्कुलर (सर्कुलर संख्या/अधिसूचना सं: एसओ.3255 (ई )दिनांक 19.06.2026) जारी किया।इस सर्कुलर के माध्यम से सभी क्षेत्रीय रेलवे कार्यालयों (जैसे उत्तर रेलवे, दक्षिण रेलवे आदि) को नियमों में किए गए संशोधनों को लागू करने के कड़े निर्देश भेजे गए थे।जोनल रेलवे के ताजा सख्त निर्देश: इस मुख्य आदेश के अनुपालन में, विभिन्न रेलवे जोनों (जैसे चेन्नई और दक्षिण रेलवे प्रभागों) ने अक्टूबर 2026 में फिर से विशेष जन- जागरूकता और कड़े दिशा- निर्देश जारी किए हैं ताकि ट्रेन के भीतर मोबाइल स्पीकर पर रील्स चलाकर उपद्रव करने वालों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।यह संशोधित नियम पूरे देश में तत्काल प्रभाव से पूरी तरह लागू हैं।रेलवे बोर्ड के जून 2026 के सर्कुलर के बाद से ही चेकिंग स्टाफ (टीटी ई), रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ़) और राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी ) को रेलवे अधिनियम की संशोधित धारा 145 (उपद्रव मचाना) और धारा 147 (अतिक्रमण/स्टंट रील बनाना) के तहत मौके पर ही जुर्माना वसूलने और कानूनी कार्रवाई करने का पूर्ण अधिकार मिल चुका। यह जानकारी मीडिया से उठाई गई है।
साथियों बात अगर हम मोबाइल पर तेज आवाज में रील चलाना भी बन सकता है कानूनी परेशानी क़े कारण को समझने की करें तो, रेल यात्रा के दौरान प्रत्येक यात्री को आराम से सफर करने, पढ़ने, सोने और शांत वातावरण में समय बिताने का अधिकार है। यदि कोई व्यक्ति मोबाइल फोन के स्पीकर पर लगातार तेज आवाज में रील, गाने या वीडियो चलाता है अथवा जोर-जोर से बातचीत करके सहयात्रियों को परेशान करता है, तो परिस्थितियों के अनुसार यह रेलवे अधिनियम के तहत उपद्रव की श्रेणी में आ सकता है। रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 145 उपद्रव, अभद्र व्यवहार तथा यात्रियों की सुविधाजनक यात्रा को प्रभावित करने वाले कुछ कृत्यों से संबंधित है। इसके अंतर्गत कार्रवाई की जा सकती है और संबंधित व्यक्ति को रेलवे परिसर से हटाने की भी व्यवस्था है। भारतीय रेलवे से संबंधित 19 अक्टूबर की मीडिया रिपोर्टों में पहली कार्रवाई के लिए 1,000 रूपए तक के जुर्माने और गंभीर या बार-बार उल्लंघन की स्थिति में अधिक कठोर दंड का सटीकता से उल्लेख किया गया है।
साथियों बात अगर हम 1,000 से 5,000 रूपए तक जुर्माना और जेल: किन बातों को समझना जरूरी है? इसको समझने की करें तो,इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण पहलू दंड के बारे में सही जानकारी है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, रेलवे के हालिया निर्देशों में उपद्रव करने वाले यात्रियों के लिए 1,000 रूपए तक का जुर्माना और कुछ परिस्थितियों में छह महीने तक की कैद का उल्लेख किया गया है।चेतावनी के बाद भी उपद्रव जारी रखने पर 5,000 रूपए तक के जुर्माने की संभावना भी रिपोर्ट की गई है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि मोबाइल पर हर वीडियो देखने वाले यात्री पर स्वतः 5,000 रूपए का जुर्माना लगेगा या उसे निश्चित रूप से जेल भेज दिया जाएगा। कार्रवाई संबंधित कानून, अपराध के तथ्यों, लागू दंड प्रावधानों और सक्षम प्राधिकारी की प्रक्रिया के अनुसार होगी। सामान्य रूप से ईयरफोन लगाकर वीडियो देखना या संगीत सुनना प्रतिबंधित नहीं है, बशर्ते इससे दूसरे यात्रियों को परेशानी न हो और रेलवे के अन्य नियमों का उल्लंघन न किया जाए। इसलिए यात्रियों को भय के बजाय नियमों की सही समझ के साथ जिम्मेदारी से व्यवहार करना चाहिए।
साथियों बात अगर हम जन विश्वास अधिनियम, 2026 और रेलवे अधिनियम की कानूनी पृष्ठभूमि को समझने की करें तो,जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी 7 अप्रैल 2026 को मिली और इसे 8 अप्रैल 2026 को राजपत्र में प्रकाशित किया गया। केंद्र सरकार की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस कानून के माध्यम से 79 केंद्रीय अधिनियमों के 784 प्रावधानों में संशोधन किए गए और 717 प्रावधानों को अपराध मुक्त करने की दिशा में कदम उठाया गया। इसका व्यापक उद्देश्य छोटे उल्लंघनों के लिए दंड व्यवस्था को तर्कसंगत बनाना और नियामकीय प्रक्रियाओं को सटिका से अधिक व्यावहारिक बनाना है।
साथियों मोबाइल पर तेज आवाज में वीडियो चलाने की समस्या से अलग,चलती ट्रेन से झूलना,दरवाजे पर असुरक्षित ढंग से खड़े होकर वीडियो बनाना या रेलवे ट्रैक पर जोखिम भरी गतिविधियां करना कहीं अधिक गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा करता है। ऐसी हरकत से संबंधित व्यक्ति के साथ-साथ रेल परिचालन और दूसरे लोगों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है। रेलवे अधिनियम की धारा 147 बिना वैध अधिकार रेलवे परिसर में प्रवेश करने, रेलवे संपत्ति का दुरुपयोग करने अथवा वैध निर्देश के बावजूद वहां से हटने से संबंधित है। इस धारा का उपयोग तथ्यों के आधार पर हो सकता है, लेकिन हर प्रकार की रील बनाने को अपने आप धारा 147 के तहत अपराध घोषित करना सही नहीं होगा। इसी तरह, प्रत्येक वीडियो के लिए लिखित अनुमति अनिवार्य होने का व्यापक दावा भी संबंधित स्थान, गतिविधि और लागू रेलवे निर्देशों की पुष्टि के बिना नहीं किया जाना चाहिए।युवाओं को यह समझना होगा कि सोशल मीडिया पर कुछ क्षणों की लोकप्रियता जीवनभर की सुरक्षा से अधिक महत्वपूर्ण नहीं है। किसी भी वायरल वीडियो की नकल करने से पहले यह देखना आवश्यक है कि उसमें दिखाई गई गतिविधि सुरक्षित और वैध है या नहीं। रेलवे ट्रैक,चलती ट्रेन के दरवाजे और रेलगाड़ी की छत मनोरंजन या स्टंट के स्थान नहीं हैं। ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देने के बजाय सुरक्षित और रचनात्मक सामग्री बनाने की संस्कृति को प्रोत्साहित करना समय की मांग है।
साथियों बात अगर हम रेलवे कर्मचारी क्या कर सकते हैं और यात्री शिकायत कैसे करें? इसको समझने की करें तो, रेलवे कर्मचारियों तथा संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वे लागू नियमों के अनुसार यात्रियों को सचेत करें और उल्लंघन होने पर उचित कार्रवाई करें। टिकट जांच कर्मचारी,रेलवे सुरक्षा बल और राजकीय रेलवे पुलिस अपनी-अपनी वैधानिक शक्तियों तथा अधिकार -क्षेत्र के भीतर काम करते हैं। किसी कर्मचारी को निर्देश देने या कार्रवाई करने का अधिकार होना और प्रत्येक मामले में मौके पर ही मनमाना जुर्माना लगाने का अधिकार होना दो अलग बातें हैं।इसलिए यात्रियों को कार्रवाई की स्थिति में संबंधित नियम और आधिकारिक प्रक्रिया की जानकारी मांगनी चाहिए।
साथियों, यदि यात्रा के दौरान कोई व्यक्ति तेज आवाज में मोबाइल चलाकर परेशानी पैदा करता है, अभद्र व्यवहार करता है या रेलवे सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न करता है, तो यात्री रेलवेके आधिकारिक शिकायत माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं। रेल मदद पोर्टल या ऐप तथा रेलवे हेल्पलाइन 139 के माध्यम से शिकायत की जा सकती है। शिकायत में ट्रेन संख्या, कोच, यात्रा का समय और समस्या का संक्षिप्त विवरण देना उपयोगी रहता है। यदि तत्काल सुरक्षा का खतरा हो, तो रेलवे कर्मचारियों या सुरक्षा कर्मियों को तुरंत सूचित करना चाहिए। यात्रियों को स्वयं किसी उपद्रवी व्यक्ति से भिड़ने अथवा जोखिम उठाकर वीडियो बनाने की आवश्यकता नहीं है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि रेलवे केवल परिवहन का साधन नहीं, साझा सार्वजनिक जिम्मेदारी भी हैभारतीय रेलवे में अनुशासन कायम करना केवल सरकार, रेलवे बोर्ड या सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं है। हर यात्री का व्यवहार दूसरे यात्रियों के अनुभव और सुरक्षा को प्रभावित करता है। मोबाइल पर तेज आवाज में रील चलाने से बचना ईयरफोन का इस्तेमाल करना, सार्वजनिक स्थानों पर मर्यादित आवाज में बातचीत करना और खतरनाक स्टंट से पूरी तरह दूर रहना सामान्य नागरिक शिष्टाचार के साथ- साथ सुरक्षित रेल यात्रा की बुनियादी शर्तें हैं। 19 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टों से स्पष्ट संदेश मिलता है कि रेलवे सार्वजनिक स्थानों पर मोबाइल से होने वाले उपद्रव को गंभीरता से ले रहा है।साथ ही,खतरनाक रीलबाजी रोकने के लिए जागरूकता, निगरानी और लागू कानूनों के अनुसार कार्रवाई आवश्यक है। सोशल मीडिया पर लोकप्रियता क्षणिक हो सकती है, लेकिन सुरक्षा और जिम्मेदारी का महत्व स्थायी है। रेल यात्रा को सुरक्षित, शांतिपूर्ण और सुविधाजनक बनाना तभी संभव है, जब हर यात्री यह समझे कि सार्वजनिक स्थान पर उसकी स्वतंत्रता वहीं तक है, जहां तक वह दूसरों के अधिकारों और सुरक्षा का सम्मान करती है।
-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318
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