आयुकृति ऑर्गेनिक के जरिए 25 तरह के फल-सब्जियों के पाउडर और फ्लेक्स का उत्पादन
20 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार और 50 परिवारों को अप्रत्यक्ष रूप से मिल रहा काम
नया सवेरा नेटवर्क
जौनपुर। सुविधासंपन्न जीवन और निश्चित मुनाफे वाले व्यवसाय को छोड़कर किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादों की बर्बादी रोकने और रोजगार सृजन का लक्ष्य लेकर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में कदम रखना आसान नहीं है। जौनपुर में जन्मीं और पली-बढ़ीं सुप्रिया राय ने इसी चुनौती को अवसर में बदलने का प्रयास किया है। वाराणसी के रामनगर औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 में स्थापित उनका उद्यम ‘आयुकृति ऑर्गेनिक’ कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण के जरिए किसानों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई संभावनाओं से जोड़ रहा है।
सुविधाओं के बीच चुनी मिट्टी और खेती से जुड़ी राह
सुप्रिया राय को बेहतर शिक्षा और सुविधासंपन्न जीवन का अवसर मिला। सिविल सेवा की तैयारी करने के बाद भी उन्हें महसूस हुआ कि उनकी रुचि किसी दूसरे क्षेत्र में है। वाराणसी में उपलब्ध संसाधनों और संपत्तियों के बावजूद उन्होंने अपने पसंदीदा विषयों पर शोध जारी रखा। इस दौरान मिट्टी, कृषि उपज, खाद्य सामग्री और नए प्रयोगों के प्रति उनका लगाव और स्पष्ट होता गया। इसी रुचि ने उन्हें उद्यमिता की राह पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
केले की बर्बादी ने दिखाई प्रसंस्करण की राह
सुप्रिया ने शुरुआत केले के व्यवसाय से की। इस दौरान उन्होंने देखा कि बाजार में कई बार अच्छे केले भी बिक्री न होने के कारण खराब हो जाते हैं। इससे उन्हें कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण की संभावनाओं पर विचार करने की प्रेरणा मिली। विस्तृत शोध के बाद उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को चुना। उनका मानना है कि कृषि उपज का बेहतर उपयोग करके किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है, खाद्य पदार्थों की बर्बादी कम की जा सकती है और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
आयुकृति ऑर्गेनिक में 25 तरह के उत्पाद तैयार
आयुकृति ऑर्गेनिक में डिहाइड्रेशन तकनीक के माध्यम से फल, सब्जियों और पत्तों से पाउडर तथा फ्लेक्स तैयार किए जा रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यहां करीब 25 प्रकार के उत्पाद बनाए जा रहे हैं। इकाई का उद्देश्य कृषि उत्पादों को लंबे समय तक उपयोग योग्य बनाना और उनके मूल्य में वृद्धि करना है। गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उत्पादन पर जोर दिया जा रहा है। उद्यम की अगली योजना निर्यात बाजार में भी अपनी पहचान स्थापित करने की है।
20 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार, 50 परिवारों को अप्रत्यक्ष लाभ
इस उद्यम का प्रभाव उत्पादन इकाई तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से करीब 20 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है, जबकि लगभग 50 परिवारों को अप्रत्यक्ष रूप से काम मिल रहा है। कृषि उत्पादों की खरीद, प्रसंस्करण और अन्य गतिविधियों से स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाएं बढ़ रही हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्यमों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
किसानों को ऑर्गेनिक खेती और कैश क्रॉप से जोड़ने की पहल
भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी और उत्तर प्रदेश के खाद्य प्रसंस्करण विभाग के सहयोग एवं समर्थन से क्षेत्र में किसानों को प्रसंस्करण और वैकल्पिक फसलों की संभावनाओं के प्रति जागरूक करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत मोरिंगा, अश्वगंधा, सफेद मूसली और पिंक ताइवान अमरूद जैसी फसलों की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सुप्रिया राय के सहयोग से कई किसान संगठन जैविक खेती की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के साथ अतिरिक्त आय के विकल्प उपलब्ध कराना है।
औद्योगिक हितों और सामाजिक सेवा में भी सक्रिय
सुप्रिया राय उद्यमिता के साथ सामाजिक गतिविधियों में भी भागीदारी निभा रही हैं। उत्तर प्रदेश औद्योगिक एसोसिएशन के माध्यम से वह औद्योगिक क्षेत्र के विकास और कर्मचारियों के हितों से जुड़े मुद्दे उठाती हैं। उनकी अध्यक्षता में हितचिंतक फाउंडेशन रक्तदान और बुनियादी शिक्षा के क्षेत्र में जनसेवा के कार्य कर रहा है। इस तरह वह उद्योग, कृषि और सामाजिक सरोकारों को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं।
सफल महिला उद्यमी सम्मान से हुईं सम्मानित
सुप्रिया राय को हाल ही में सफल महिला उद्यमी सम्मान से सम्मानित किया गया। उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो के खाद्य प्रसंस्करण खंड में आयुकृति ऑर्गेनिक को चंदौली और वाराणसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के लिए आमंत्रित किया गया था। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक मांगी लाल जाट और उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण विभाग के निदेशक बीएल मीणा भी उनके प्रयासों की सराहना कर चुके हैं।
कृषि आधारित उद्योगों में नई संभावनाओं की उम्मीद
सुप्रिया राय का प्रयास दिखाता है कि कृषि उत्पादों का वैज्ञानिक प्रसंस्करण किसानों की आय बढ़ाने, उपज की बर्बादी कम करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। जौनपुर से जुड़ी इस उद्यमी की पहल पूर्वांचल में कृषि आधारित उद्योगों के विकास की संभावनाओं को भी सामने लाती है।
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