ग्राम पंचायत अधिकारी पर कमीशन मांगने और पोषण धन में कटौती का आरोप, मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग
बरसठी, जौनपुर। भीषण गर्मी के बीच निराश्रित गोवंशों के संरक्षण को लेकर प्रदेश सरकार लगातार संवेदनशीलता दिखा रही है, लेकिन विकास खंड बरसठी के गोरापट्टी गांव से सामने आया मामला सरकारी दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रहा है। वर्षों से संचालित अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल को लेकर ग्राम प्रधान ने मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर गोवंशों के भरण-पोषण के नाम पर गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। शिकायत में ग्राम पंचायत अधिकारी पर कमीशन मांगने, पोषण मद की धनराशि में कटौती करने तथा गोवंशों की देखरेख की जिम्मेदारी से किनारा करने का आरोप लगाया गया है। शिकायत के बाद विकास खंड के प्रशासनिक महकमे में मामले को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
गोरापट्टी की ग्राम प्रधान कृष्णावती देवी द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र के अनुसार ग्राम सभा में 110 गोवंशों के लिए अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल संचालित है। प्रधान का आरोप है कि ग्राम पंचायत अधिकारी अमित कुमार यादव द्वारा गोवंशों के भरण-पोषण मद से बार-बार कमीशन की मांग की जाती रही। आरोप है कि कमीशन न दिए जाने पर फरवरी माह में गोवंशों की संख्या कम दर्शाकर लगभग 50 हजार रुपये की धनराशि घटा दी गई। प्रधान का कहना है कि बाद में अभिलेखों में पुनः 110 गोवंश दर्शाए जाने लगे। इसके बावजूद उनसे लगातार कमीशन की मांग कर प्रताड़ित किया जाता रहा। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पूर्व खंड विकास अधिकारी को गुमराह कर गोरापट्टी गोआश्रय स्थल से 20 से 25 गोवंशों को दो बार अन्य गोवंश आश्रय स्थलों में भेज दिया गया। इसके बाद अधिकारियों ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि गांव की गोशाला बंद कर दी गई है।
शिकायती पत्र में दावा किया गया है कि गोशाला बंद बताए जाने के बावजूद 85 गोवंश आज भी गोआश्रय स्थल में मौजूद हैं। इन गोवंशों की देखभाल, चारा और पानी की व्यवस्था की जिम्मेदारी लेने को न तो कोई अधिकारी तैयार है और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। प्रधान का कहना है कि यदि वह स्वयं इन गोवंशों के भोजन और देखरेख की व्यवस्था न करें तो एक-दो दिन के भीतर ही उनकी स्थिति गंभीर हो सकती है। प्रधान ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की जांच कराकर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही निराश्रित गोवंशों के भरण-पोषण एवं संरक्षण की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने की भी गुहार लगाई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गोशाला वास्तव में बंद हो चुकी है तो वहां मौजूद 85 गोवंशों की जिम्मेदारी आखिर किसकी है। गौतरलब हो कि प्रदेश सरकार द्वारा गोवंश संरक्षण को लेकर लगातार निर्देश जारी किए जा रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री तक पहुंची यह शिकायत स्थानीय स्तर पर संचालित व्यवस्थाओं और उनकी निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगा रही है।
इस संबंध में खंड विकास अधिकारी जगदीश प्रसाद ने बताया कि गोआश्रय स्थल के संचालन में लापरवाही पाए जाने पर वहां से गोवंशों को अन्य आश्रय स्थलों में स्थानांतरित किया गया था। यदि इसके बाद भी गोवंशों की संख्या बढ़ी है तो इसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि गोआश्रय स्थल के संचालन के लिए प्रधान और सचिव दोनों जिम्मेदार हैं। गोवंशों के भरण-पोषण के लिए प्रशासन की ओर से आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।


