नया सवेरा नेटवर्क
जबसे जानने समझने लायक हुआ हूॅं लगभग ५० वर्षों से,एक शब्द जो बहुत सुनने में आया वो है गद्दार।अब सवाल यह पैदा होता है कि गद्दार है कौन।गद्दारी होती क्या है।आज हम उसी विषय को लेकर उपस्थित हुए हैं।आज जब कोई नेता एक पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में जाता है तो जिस पार्टी से निकलता है उस पार्टी वाले उसे गद्दार कहते हैं।जबकी यह गद्दार की श्रेणी में नहीं आता।यदि आता है तो देश के तमाम नेता गद्दार ही हैं।जैसे शरद पवार, ममता बनर्जी, मुलायम सिंह,लालू यादव,चंद्रशेखर,करुणानिधि,राज ठाकरे,नारायण राणे,छगन भुजबल,वीपी सिंह,नारायण दत्त तिवारी, नीतीशकुमार, शत्रुघ्न सिन्हा, कीर्ति आजाद, गुलाम नबी आजाद,मुफ्ती मोहम्मद सईद आदि आदि।ऐसे तमाम नेता हैं जो दल के दलदल में उछल कूद कर रहे हैं। जहाॅं जिसका मन भर जाता है या टिकट नहीं पाता तो वह पाला बदल लेता है।
जब उपरोक्त लोग गद्दार नहीं हैं तो एकनाथ शिंदे,आनंद दूबे,संजय निरूपम,हेमंत विश्वशर्मा,सुभेन्दु अधिकारी,आदि गद्दार कैसे हो गये।ए तो गजब है।हम करें तो रास लीला,और करें तो चरित्र हीन।अब यह देश में नहीं चलेगा।जनता सब देख सुन समझ रही है।दल बदल गद्दार की श्रेणी में नहीं आता।यह केवल और केवल वैचारिक मतभेद हैं।इसके सिवा कुछ नहीं।और जो दल बदल को गद्दारी कहे तो मतलब वो चमचा है किसी एक का।
मजे की बात ए है कि जब जहाॅं गद्दारी हुई।वहाॅं किसी ने किसी को गद्दार नहीं कहा। बल्कि शिर माथे पर बैठाकर आज भी जिन्दाबाद कहते थकता नहीं।देश पर बलिदान होने वाले उन शहीदों के परिवार आज भी जलालत भरी जिंदगी जीने को विवश हैं। जिन्होंने अपनी पूरी जिन्दगी बलिदान कर दी,उनका नाम तक नहीं लिया जाता। इतिहासकारों ने पता नहीं क्यों शूरवीरों की गाथा को नहीं गाया। गद्दारी यह है।जिन जिन ने अंग्रेजों से मिलकर देश के टुकड़े करवा दिया।आरक्षण जैसा कोढ़ दिया।जाति धर्म के नाम से देश में जहर घोला।वे पूजनीय हो गये।शहीद भी वही कहलाये जा रहे हैं। संसार के सारे सुख सपरिवार भोग रहे हैं।जबकी असली गद्दार यही लोग रहे और हैं।
गद्दार वो हैं जो जनता को देशवासियों को बेवकूफ बनाकर वोट लेते हैं।और किये वादे को पूरा नहीं करते।जनता के लिए प्राप्त धन का अपनी ऐय्यासी के लिए खर्च करते हैं। गद्दार ये हैं।जिस विचार धारा से जनता से वोट मांगते हैं और जीतकर आने के बाद सत्ता सुख के लिए उसी विचारधारा की तिलांजलि देकर जिसका विरोध किए थे, जिसे हर मंच से पानी पी पीकर कर कोसे थे,उसी से हाॅंथ मिला लिए। गद्दारी ये है।भारत तेरे टुकड़े होंगे,नारा लगाने वाले और उसे अभिव्यक्ति की आजादी का नाम देकर समर्थन देने वाले वे सभी लोग देशद्रोही व गद्दार हैं।जिसका खायें, जिसके दम पर शीर्ष पर चढ़ें,जिसके समर्थन से राजा बनें,उसी के शिर पर गंदगी करें। गद्दारी ये है।पार्टी बदलना गद्दारी नहीं है। स्वहित है।देश की जनता का पैसा खाकर और कुछ काम न करना गद्दारी है। उपरोक्त ऐसे सभी लोग गद्दार हैं जो जनहित और देशहित को परे करके सिर्फ सुख भोगने के लिए।दूसरे देश का गुणगान और अपने देश को नक्सल और आतंकवाद व जाति धर्मवादी दंगों की तरफ उन्मुख करें।भाषा और प्रांत के नाम पर लोगों को अलग करे। भारतीय को भारतीय से अलग करे।वो गद्दार है।पाला बदलना ये आपसी मान मनौव्वल वाली बात है। गद्दारी नहीं।
पं. जमदग्निपुरी
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