सुविधा शुल्क आम जनता दे, मौज मुफ्तखोर करें !

Naya Savera Network
आखिर कब बदलेगी व्यवस्था ?

सुविधा का लाभ उठाते मुफ्तखोर !

देश में हर नागरिक बेहतर और, सम्मानजनक जीवन जीने के लिए सुविधाएं चाहता है। 
इन सुविधाओं के बदले सरकार विभिन्न प्रकार के शुल्क और कर वसूलती है। सिद्धांत यह है कि जितनी बेहतर सुविधा, उतना अधिक शुल्क। लेकिन आज सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वास्तव में सुविधा उसी व्यक्ति तक पहुंच रही है, जो उसके लिए अपनी जेब से भुगतान कर रहा है?

विडंबना यह है कि जो आम नागरिक हर महीने टैक्स देता है, टिकट खरीदता है, पास बनवाता है और सुविधा शुल्क चुकाता है, वही सबसे अधिक परेशान दिखाई देता है। दूसरी ओर कई ऐसे लोग हैं जो बिना शुल्क दिए या नियमों की अनदेखी कर उन्हीं सुविधाओं का भरपूर लाभ उठा रहे हैं। यही स्थिति आम जनता के मन में असंतोष और व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा करती है।

मुंबई महानगर इसका एक बड़ा उदाहरण है। लाखों लोग रोज़ी-रोटी की तलाश में प्रतिदिन लोकल ट्रेनों से सफर करते हैं। जनरल डिब्बों में इतनी भीड़ होती है कि कई स्टेशनों पर यात्रियों को ट्रेन में चढ़ना तक मुश्किल हो जाता है। राहत की उम्मीद में लोग प्रथम श्रेणी का महंगा पास बनवाते हैं, लेकिन वहां भी भीड़ कम नहीं होती। शिकायतें बढ़ीं तो एसी लोकल शुरू की गई, जिसका किराया प्रथम श्रेणी से भी अधिक रखा गया। यात्रियों ने सोचा कि अतिरिक्त शुल्क देने पर कम से कम आरामदायक यात्रा मिलेगी, लेकिन वहां भी बिना टिकट या नियमों का उल्लंघन करने वालों की मौजूदगी ने भुगतान करने वाले यात्रियों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

यही स्थिति लंबी दूरी की रेल यात्राओं में भी देखने को मिलती है। लोग महीनों पहले टिकट आरक्षित कराते हैं, सुविधा शुल्क देते हैं और समय पर यात्रा की योजना बनाते हैं। इसके बावजूद कई बार आरक्षित डिब्बों में वेटिंग टिकट या बिना टिकट यात्रियों की भीड़ दिखाई देती है। परिणाम यह होता है कि नियमों का पालन करने वाला यात्री ही सबसे अधिक असुविधा झेलता है, जबकि नियम तोड़ने वाले बेफिक्र होकर यात्रा करते हैं।

आम नागरिक का दर्द केवल इतना है कि यदि वह सुविधा के लिए भुगतान कर रहा है, तो उसे उसका उचित लाभ भी मिलना चाहिए। व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें नियमों का पालन करने वालों को सम्मान मिले और नियम तोड़ने वालों पर प्रभावी कार्रवाई हो।

जब तक सुविधा का वास्तविक लाभ शुल्क देने वाले नागरिक तक नहीं पहुंचेगा और मुफ्तखोरी तथा नियमों की अनदेखी पर सख्ती नहीं होगी, तब तक "सुविधा शुल्क" आम आदमी के लिए केवल एक अतिरिक्त बोझ बनकर रह जाएगा।

 पं. जमदग्निपुरी

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