लखनऊ। उत्तर प्रदेश पशुधन विकास परिषद एवं पशुपालन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में कृत्रिम गर्भाधान एवं टीकाकरण की जागरूकता एवं गुणवत्ता सुधार विषयक राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला का उद्देश्य पशुधन में कृत्रिम गर्भाधान एवं टीकाकरण के आच्छादन में गुणात्मक एवं संरचनात्मक सुधार लाना, डिजिटल अभिलेखीकरण को बढ़ावा देना तथा पशु प्रजनन एवं स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना रहा। इसमें देशभर के विषय-विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, पशु चिकित्सकों एवं पशुपालन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपर मुख्य सचिव (पशुधन) मुकेश कुमार मेश्राम (आईएएस) ने पशु स्वास्थ्य, प्रजनन, टीकाकरण तथा कृत्रिम गर्भाधान के डिजिटल अभिलेखीकरण एवं माइक्रो प्लानिंग के महत्व पर प्रकाश डाला। तकनीकी सत्र में वर्गीकृत वीर्य (सेक्सड सीमेन) से कृत्रिम गर्भाधान, डिजिटल अनुश्रवण, टीकाकरण की गुणवत्ता तथा सीरो सर्विलांस जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत जानकारी दी।
कार्यशाला में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 216.30 लाख कृत्रिम गर्भाधान के वार्षिक लक्ष्य की दिशा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले हापुड़, पीलीभीत, कौशांबी, हरदोई एवं शामली जनपदों को सम्मानित किया गया। वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में एफएमडी (राउंड-7) टीकाकरण अभियान के 351.86 लाख के वार्षिक लक्ष्य के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने पर अलीगढ़, लखनऊ, गाजियाबाद, जौनपुर एवं पीलीभीत जनपदों को भी सम्मान प्रदान किया गया।
इस अवसर पर निदेशक डा. राजेन्द्र प्रसाद, डा. संगीता तिवारी, संयुक्त निदेशक डा. प्रतिभा सचान, डा. विजय कुमार पाण्डेय तथा सीईओ डा. प्रमोद कुमार सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

