मुंबई। किसी भी देश की संस्कृति और उसकी जड़ों को समझने के लिए उसके लोक साहित्य को समझना जरूरी है। लोक साहित्य में उस देश की प्राचीन संस्कृति, परंपराएं, लोकविश्वास और सामाजिक जीवन की जीवंत झलक मिलती है। यह बात अयोध्या से आईं भोजपुरी एवं अवधी भाषा की लोकगायिका संजोली पांडेय ने जोगेश्वरी में अभियान संस्था द्वारा आयोजित कजरी महोत्सव के दौरान कही।
संजोली पांडेय ने कहा कि लोकगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे हमारी सांस्कृतिक स्मृतियों और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं के संवाहक हैं। कजरी जैसे लोकगीतों में गांव-गिरांव का जीवन, सावन की हरियाली, रिश्तों की आत्मीयता, लोक आस्था और स्त्री मन की भावनाएं सहज रूप से अभिव्यक्त होती हैं।
कार्यक्रम में संजोली पांडेय ने कजरी की विभिन्न विधाओं के साथ भोजपुरी, अवधी और अन्य लोकगीतों की विविध प्रस्तुतियां देकर श्रोताओं को लोक संस्कृति के रंग में रंग दिया। उनकी प्रस्तुति में सावन की रिमझिम, मायके की याद, प्रेम, विरह और लोक आस्था के अनेक भाव एक साथ दिखाई दिए। उन्होंने लोकगीतों के विविध आयामों को समेटते हुए मानो ‘गागर में सागर’ भरने का प्रयास किया।
इस अवसर पर भाजपा नेता अमरजीत मिश्र द्वारा आयोजित कजरी महोत्सव की भी सराहना हुई। वक्ताओं ने कहा कि मुंबई जैसे महानगर में, जहां नई पीढ़ी तेजी से आधुनिक जीवनशैली की ओर बढ़ रही है, वहां लोकभाषा और लोक संस्कृति को मंच देना अपने आप में महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पहल है।
अमरजीत मिश्र ने कहा कि अभियान संस्था पिछले दो दशकों से सावन के अवसर पर कजरी महोत्सव के माध्यम से उत्तर भारतीय लोक परंपराओं को मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में जीवंत बनाए रखने का प्रयास कर रही है। उनका कहना है कि यह आयोजन केवल गीत-संगीत और मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और पारंपरिक गीतों की विरासत से जोड़ने वाला सांस्कृतिक आंदोलन बन चुका है।
जोगेश्वरी में आयोजित इस कजरी महोत्सव में बड़ी संख्या में लोकगीत प्रेमियों ने भाग लिया। संजोली पांडेय की प्रस्तुतियों पर श्रोताओं ने तालियों से उत्साहवर्धन किया और सावन की लोक परंपरा का भरपूर आनंद लिया।
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