भारतीय पीएम की इंडो- पैसिफिक यात्रा 6-11 जुलाई 2025 :भारत की एक्ट ईस्ट नीति का नया अध्याय और हिंद- प्रशांत में उभरती वैश्विक शक्ति की रणनीति- व्यापक समग्र विश्लेषण

Naya Savera Network

गोंदिया -वैश्विक स्तरपर भारतीय पीएम की 6 से 11 जुलाई 2026 तक की इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड की छह दिवसीय यात्रा जिसपर भारत से पूरे विश्व की नज़रें लगी हुई है,केवल तीन देशों काराजनयिक दौरा नहीं है, बल्कि यह भारत की लगभग एक दशक से अधिक समय से विकसित हो रही एक्ट ईस्ट  नीति का सबसे परिपक्व और व्यापक स्वरूप है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब हिंद- प्रशांत क्षेत्र विश्व राजनीति, वैश्विक अर्थव्यवस्था,समुद्री व्यापार, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और सामरिक संतुलन का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है, विश्व की लगभग आधी आबादी, वैश्विक जीडीपी का बड़ा हिस्सा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार काअधिकांश भाग इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। ऐसे में मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि भारत का इस क्षेत्र में सक्रिय,संतुलित और बहु आयामी नेतृत्व केवल उसकी विदेश नीति का विस्तार नहीं बल्कि उसकी वैश्विक भूमिका का पुनर्परिभाषण भी है। यही कारण है कि इस यात्रा को एक्ट ईस्ट नीति के एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।यह यात्रा केवल एक नियमित विदेश दौरा नहीं है, बल्कि यह उस बदलती वैश्विक व्यवस्था का🙏 प्रतीक है जिसमें भारत स्वयं को हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र के एक उत्तरदायी, विश्वसनीय और निर्णायक साझेदार के रूप में स्थापित कर रहा है।जिसपर भारत से पूरे विश्व की नजरें लगी हुई है इस यात्रा का उद्देश्य भारत की एक्ट ईस्ट नीति, मुक्त, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक,समुद्री सुरक्षाव्यापार प्रौद्योगिकी, रक्षा सहयोग, महत्वपूर्ण खनिजों, आपूर्ति श्रृंखला और लोगों के बीच संबंधों को नई गति देना है। इस दौरान तीनों देशों के शीर्ष नेतृत्व से द्विपक्षीय वार्ता, व्यापारिक समुदाय से संवाद और भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ संपर्क कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। 
साथियों, आज विश्व की भू-राजनीति का केंद्र तेजी से हिंद -प्रशांत क्षेत्र की ओर स्थानांतरित हो रहा है। वैश्विक समुद्री व्यापार का बड़ा भाग इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है, जबकि ऊर्जा आपूर्ति,डिजिटल कनेक्टिविटी और वैश्विक उत्पादन नेटवर्क भी इसी क्षेत्र पर निर्भर हैं। ऐसे समय में भारत का उद्देश्य केवल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना नहीं है,बल्कि एक ऐसी व्यवस्था को मजबूत करना भी है जिसमें अंतरराष्ट्रीय कानून,नौवहन की स्वतंत्रता और सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान बना रहे। यही कारण है कि इस यात्रा को अनेक अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ 2026 की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहलों में से एक मान रहे हैं।भारत की एक्ट ईस्ट नीति अब केवल दक्षिण- पूर्व एशिया के साथ सांस्कृतिक संबंधों तक सीमित नहीं रही। यह आर्थिक,सामरिक,तकनीकी और समुद्री साझेदारी का व्यापक ढांचा बन चुकी है। इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड इस रणनीति के तीन महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। 
साथियों, इंडोनेशिया विश्व का सबसे बड़ा मुस्लिम-बहुल लोकतंत्र है और मलक्का जलडमरूमध्य के निकट उसकी रणनीतिक स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है।ऑस्ट्रेलिया महत्वपूर्ण खनिजों, रक्षा सहयोग और हिंद-प्रशांत सुरक्षा का प्रमुख भागीदार है, जबकि न्यूज़ीलैंड के साथ व्यापार, कृषि, शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग की व्यापक संभावनाएँ हैं।इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक आयाम चीन के बढ़ते प्रभाव की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।भारत ने कहीं भी प्रत्यक्ष टकराव की नीति नहीं अपनाई है,लेकिन वह नियम- आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और संतुलित शक्ति संरचना का समर्थन करता है। दक्षिण चीन सागर, समुद्री मार्गों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रश्नों पर भारत समान विचार वाले देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा किसी सैन्य गठबंधन का संदेश नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता, संतुलन और साझेदारी का संकेत है।भारत और इंडोनेशिया के संबंध इस यात्रा में विशेष महत्व रखते हैं। दोनों देश हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाले समुद्री क्षेत्र में स्थित हैं। रक्षा सहयोग,समुद्री निगरानी, डिजिटल साझेदारी, बंदरगाह विकास और संभावित रक्षा निर्यात जैसे विषय एजेंडे में शामिल हैं। विशेष रूप से ब्रह्मोस मिसाइल और समुद्री सुरक्षा सहयोग पर चर्चा अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक समुदाय की निगाहों में है। 
साथियों, ऑस्ट्रेलिया के साथ संबंध पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व गति से मजबूत हुए हैं। आज दोनों देश केवल लोकतांत्रिक साझेदार नहीं बल्कि महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी भी हैं।रक्षा अभ्यास, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा, विज्ञान तथा महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति इस संबंध के प्रमुख आधार बन चुके हैं।विशेष रूप से लिथियम, कोबाल्ट और अन्य महत्वपूर्ण खनिज भारत के ऊर्जा संक्रमण और सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।विश्व अर्थव्यवस्था आज आपूर्ति श्रृंखलाओं के पुनर्गठन के दौर से गुजर रही है। महामारी, भू- राजनीतिक तनाव और क्षेत्रीय संघर्षों ने देशों को विश्वसनीय साझेदार खोजने के लिए प्रेरित किया है। भारत इस अवसर को विश्वसनीय विनिर्माण केंद्र के रूप में बदलना चाहता है। यदि इस यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश, लॉजिस्टिक्स और महत्वपूर्ण खनिजों पर नए समझौते आगे बढ़ते हैं तो इसका प्रभाव भारतीय उद्योग,रोजगार और निर्यात पर भी सटीकता से दिखाई दे सकता है। 
साथियों, न्यूज़ीलैंड यात्रा का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि कई दशकों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह महत्वपूर्ण राजकीय यात्रा मानी जा रही है। कृषि अनुसंधान, डेयरी प्रौद्योगिकी,खाद्य प्रसंस्करण शिक्षा, पर्यटन और मुक्त व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग की नई संभावनाएँ खुल सकती हैं। दोनों देशों के बीच लोगों से लोगों के संबंध और भारतीय समुदाय भी इस साझेदारी की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। भारत की समुद्री नीति अब केवल तटीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है। हिंद महासागर में मानवीय सहायता, आपदा राहत,समुद्री डकैती विरोधी अभियान,समुद्री पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षित समुद्री व्यापार मार्ग भारत की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं। इसी संदर्भ में भारत का मुक्त, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण विश्व समुदाय के लिए भी सटीकता से महत्वपूर्ण बन गया है। 
साथियों, इस यात्रा में व्यापारिक समुदाय के साथ होने वाली बैठकों का भी विशेष महत्व है। भारत आज विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। डिजिटल भुगतान, स्टार्टअप, हरित ऊर्जा, रक्षा विनिर्माण और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश आकर्षित करने की भारत की क्षमता लगातार बढ़ रही है। यदि इन क्षेत्रों में नई साझेदारियाँ बनती हैं तो इसका सकारात्मक प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था और दीर्घकालिक निवेश वातावरण पर पड़ सकता है।भारतीय प्रवासी समुदाय इस, पूरी यात्रा का एक महत्वपूर्ण आयाम है।ऑस्ट्रेलिया,न्यूज़ीलैंड और इंडोनेशिया में बसेभारतीय मूल के लोग शिक्षा,व्यापार, विज्ञान चिकित्सा और सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इन समुदायों के साथ संवाद भारत की सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक कूटनीति को और मजबूत करता हैँ।विशेषज्ञों का मानना है कि 21वीं सदी की विश्व व्यवस्था केवल सैन्य शक्ति से निर्धारित नहीं होगी। तकनीक, आपूर्ति श्रृंखला, समुद्री संपर्क, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु सहयोग और विश्वसनीय साझेदारियाँ भविष्य की शक्ति के वास्तविक आधार होंगे। भारत की यह यात्रा इन्हीं सभी आयामों को एक साथ जोड़ने का प्रयास है।इस पूरी यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण आयाम हिंद-प्रशांत की सामरिक संरचना में भारत की बढ़ती भूमिका है। भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि उसका उद्देश्य किसी देश के विरुद्ध सैन्य गठबंधन बनाना नहीं, बल्कि ऐसा क्षेत्रीय वातावरण तैयार करना है जहाँ सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान हो,समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें, अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन हो और छोटे-बड़े सभी देशों को समान अवसर मिलें। यही दृष्टिकोण भारत को एक संतुलित, विश्वसनीय और जिम्मेदार शक्ति के रूप में स्थापित करता है।
अतःअगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि भारतीय पीएम की इंडो- पैसिफिक यात्रा को केवल तीन देशों की यात्रा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।यह भारत की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है जिसके माध्यम से वह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में संतुलन,सहयोग,आर्थिक विकास और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था का समर्थक बनकर उभरना चाहता है। यदि इस यात्रा से व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों और निवेश के क्षेत्रों में ठोस प्रगति होती है, तो इसका प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि पूरे इंडो- पैसिफिक क्षेत्र की रणनीतिक और आर्थिक संरचना पर भी दिखाई देगा। यही कारण है कि विश्व के नीति- निर्माता,रणनीतिक विशेषज्ञ, निवेशक और सामान्य नागरिक इस यात्रा को अत्यंत महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल के रूप में देख रहे हैं।

-संकलनकर्ता लेखक - क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

ADMISSION OPEN Session 2026–27   SS PUBLIC SCHOOL-  Siddiqpur, Jaunpur – 222003 📞 7380691111, 9453567111  SS PUBLIC SCHOOL 📢 ADMISSION OPEN Session 2026–27 Classes Bal Vatika to Class IX & XI Streams Offered (Class XI) 🔬 Science  📊 Commerce  📚 Humanities Affiliation ✔ 10+2 Affiliated to C.B.S.E., New Delhi  Siddiqpur, Jaunpur – 222003 📞 7380691111, 9453567111  Babatpur, Varanasi 📞 0542-2622303, 0542-2622304
विज्ञापन

SPECIAL OFFER - No Admission Fee  - No June Month Fee - DALIMSS SUNBEAM SCHOOL, JAUNPUR
विज्ञापन

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!