जौनपुर। डॉक्टर्स डे के अवसर पर मानसिक स्वास्थ्य को लेकर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि वर्तमान समय में मानसिक विकार तेजी से बढ़ते हुए वैश्विक स्तर पर एक गंभीर चुनौती बन चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया में हर आठ में से एक व्यक्ति किसी न किसी मानसिक बीमारी से प्रभावित है, जबकि अनुमान है कि वर्ष 2030 तक मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का आर्थिक बोझ लगभग 6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है।
इस विषय पर जौनपुर स्थित श्री कृष्णा न्यूरो एवं मानसिक रोग चिकित्सालय के डायरेक्टर डॉ. हरिनाथ यादव (एमबीबीएस, एमडी न्यूरोसाइकियाट्री) ने बताया कि डिप्रेशन, एंग्जायटी, बाइपोलर डिसऑर्डर, सिजोफ्रेनिया और मेनिया जैसी मानसिक बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो समाज के हर वर्ग को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली, सामाजिक दबाव और अनियमित दिनचर्या इसके प्रमुख कारण हैं।
डॉ. यादव ने बताया कि आज की युवा पीढ़ी डिजिटल एडिक्शन की समस्या से जूझ रही है। मोबाइल, सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग का अत्यधिक उपयोग न केवल मानसिक एकाग्रता को प्रभावित कर रहा है, बल्कि नींद की कमी, तनाव और अवसाद जैसी समस्याओं को भी बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक स्क्रीन पर समय बिताने से किशोरों में मानसिक असंतुलन का खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने आगे कहा कि कामकाजी वर्ग में लगातार बढ़ता तनाव और कार्यभार मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है, जबकि बुजुर्गों में डिमेंशिया जैसी बीमारियाँ एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही हैं। यह स्थिति आने वाले समय में और गंभीर हो सकती है यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया।
डॉ. यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि मानसिक बीमारियों को अब भी सामाजिक कलंक या अंधविश्वास की दृष्टि से देखना गलत है। आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से इनका प्रभावी उपचार संभव है। उन्होंने बताया कि उनके संस्थान में rTMS, बायोफीडबैक थेरेपी, मल्टी बिहेवियर थेरेपी (MBT) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के साथ-साथ EEG और NCS जैसी जांच सुविधाएँ उपलब्ध हैं, जिनसे रोगों की सटीक पहचान और उपचार संभव हो पाता है।
अंत में उन्होंने संदेश दिया कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, समय पर निदान और वैज्ञानिक उपचार ही इस बढ़ती समस्या का सबसे प्रभावी समाधान है।

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