Mumbai News : राजस्व विभाग का अजब कारोबार, 60 साल बाद होगी आवंटित जमीन की SIT जांच

Naya Savera Network

शिवपूजन पांडे
मुंबई। कल्याण में पद्मिनी प्रीमियर का निर्माण करने वाली प्रीमियर ऑटोमोबाइल्स की जमीन के आवंटन के मामले में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर ही सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। छह दशक से भी अधिक समय पहले, यानी 1962 से 1965 के दौरान विभिन्न सरकारी आदेशों के माध्यम से आवंटित 170 एकड़ से अधिक जमीन की जांच के लिए 4 सितंबर 2026 को एसआईटी का गठन किया गया है। खास बात यह है कि यह जांच कांग्रेस नेता नाना पटोले की शिकायत के आधार पर राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के आदेश से शुरू की गई है। शिकायत प्राप्त होने के महज 8 दिनों के भीतर बिना किसी प्राथमिक जांच के समिति गठित किए जाने से आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है।मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए उद्योग-धंधों को आमंत्रित कर रहे हैं, वहीं राजस्व विभाग इस तरह अनावश्यक कागजी कार्रवाई के जरिए उद्योगों को परेशान कर रहा है। 

ऐसे में राज्य में उद्योग कैसे आएंगे और रोजगार सृजन कैसे होगा, यह सवाल भी उठाया जा रहा है। प्रीमियर ऑटोमोबाइल्स की स्थापना 1944 में सोलापुर के उद्योगपति सेठ वालचंद हीराचंद दोशी ने सर एम. विश्वेश्वरैया के प्रोत्साहन से की थी। स्वतंत्रता के बाद देश में प्रत्यक्ष रूप से निर्मित शुरुआती वाहनों में से कुछ वाहनों का उत्पादन प्रीमियर ऑटोमोबाइल्स ने किया था। वर्ष 1953 में वालचंद हीराचंद के निधन के बाद उनके भाई लालचंद हीराचंद ने कंपनी की कमान संभाली। महाराष्ट्र के औद्योगिक विकास को गति देने के लिए सरकार के आग्रह पर हीराचंद परिवार ने राज्य में उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके तहत 1962 से 1965 के दौरान ठाणे जिले के कल्याण तालुका में 170 एकड़ से अधिक जमीन विभिन्न आदेशों के माध्यम से प्रीमियर ऑटोमोबाइल्स को दी गई। उस समय यह इलाका दूर-दराज का था और वहां औद्योगिक गतिविधियां कम थीं। रोजगार सृजन के उद्देश्य से प्रीमियर को एक बड़ा औद्योगिक यूनिट स्थापित करना था, साथ ही कुछ जमीन कर्मचारियों के आवास के लिए इस्तेमाल की जानी थी। हालांकि, इस जमीन के मूल आवंटन को छह दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद अब इसकी जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। इससे इतने लंबे समय बाद की जा रही जांच के समय और इसके पीछे की प्रशासनिक भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। 

इस बीच, कंपनी के आर्थिक संकट में आने के बाद उसकी जमीन का कुछ हिस्सा विभिन्न पक्षों को बेचा गया। करीब 55 एकड़ जमीन अनंत डेवलपर्स को विकास करार के तहत दी गई, जबकि कुछ जमीन बेचकर कंपनी ने विभाग का बकाया चुकता किया, ऐसा दावा किया गया है। वर्तमान स्थिति में 170 एकड़ जमीन में से 57 एकड़ जमीन रुनवाल समूह के पास, 55 एकड़ जमीन लोढ़ा डेवलपर्स के पास, 41 एकड़ जमीन सुंदर निवास प्रॉपर्टीज के पास और करीब 13 एकड़ जमीन विभिन्न सरकारी विभागों के पास है।औद्योगिक निवेश, जमीन आवंटन और विकास परियोजनाओं को लेकर सरकार द्वारा लिए गए हर पुराने फैसले की यदि कई दशकों बाद जांच शुरू की जाने लगे, तो भविष्य में उद्योग और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए निर्णय लेने वाले प्रशासन को इसका क्या परिणाम भुगतना पड़ेगा, यह सवाल भी इस मामले के जरिए उठाया जा रहा है। एक ओर उद्योगों को जमीन देकर रोजगार सृजन और विकास को बढ़ावा देने की नीति है, तो दूसरी ओर छह दशक बाद उन्हीं फैसलों की जांच की जा रही है। 

ऐसे में राजस्व विभाग का यह कारभार वास्तव में विकास को गति देने वाला है या निर्णय प्रक्रिया में बाधा डालने वाला, यह सवाल अब उठ खड़ा हुआ है। कांग्रेस के विधायक के 11 अगस्त के पत्र पर आठ दिनों में बैठक हुई और 19 अगस्त तक निर्णय लिया गया। इस तेजी और इसकी दिशा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के लिए 1960 के दशक में लिए गए फैसले, उसके बाद जमीन के उपयोग में आया बदलाव, न्यायालयीन प्रक्रिया और शासन के समक्ष सभी शुल्क का भुगतान किए जाने के बावजूद अब 60 साल बाद एसआईटी जांच शुरू करने का प्रशासन ने निर्णय लिया है। यह निर्णय किसी के दबाव में लिया गया है और यदि यही स्थिति बनी रही, तो भविष्य में उद्यमी महाराष्ट्र में क्यों रहें?

एलआईसी के अभिकर्ता विनोद यादव की तरफ से श्रावण मास, स्वतंत्रता दिवस, नागपंचमी और रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं
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