मुंबई। लोकभाषा और लोकसंस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था ‘अभियान’ द्वारा आयोजित कजरी महोत्सव इन दिनों मुंबई महानगर में लोक संस्कृति की अलख जगा रहा है। सावन के महीने में लगातार 16 दिनों तक मुंबई और आसपास के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित होने वाला यह अनूठा आयोजन महानगर में लोकगीतों और लोक परंपराओं के संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।
महाराष्ट्र राज्य रंगभूमि, फिल्म एवं सांस्कृतिक विकास महामंडल के पूर्व उपाध्यक्ष तथा मुंबई भाजपा के उपाध्यक्ष अमरजीत मिश्र के नेतृत्व में ‘अभियान’ संस्था पिछले दो दशकों से कजरी महोत्सव का आयोजन करती आ रही है। इस आयोजन में अब तक पद्मश्री उर्मिला श्रीवास्तव, मधु पांडेय और पद्मश्री अजिता श्रीवास्तव सहित अनेक प्रसिद्ध लोक कलाकार मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश से मुंबई आकर पारंपरिक कजरी लोकगीतों की प्रस्तुति दे चुके हैं।
इस वर्ष अयोध्या की प्रसिद्ध लोकगायिका और ‘कजरी क्वीन’ के नाम से पहचानी जाने वाली संजोली पांडेय पिछले आठ दिनों से मुंबई और आसपास के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रस्तुतियों से कजरी की गंगा बहा रही हैं। विरार और कल्याण से लेकर चर्चगेट तक आयोजित हो रहे इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोकगीत प्रेमी उमड़ रहे हैं।
चर्चगेट स्थित के.सी. कॉलेज के भव्य सभागृह में आयोजित कार्यक्रम में कोलाबा, मुंबादेवी, मालाबार हिल, फोर्ट सहित दक्षिण मुंबई के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोकगीत रसिकों ने कजरी का आनंद लिया। कजरी के सुरों ने लोगों को महानगर के शोर-शराबे से दूर गांव-जवार की पगडंडियों, सावन के झूलों और मिट्टी की सोंधी खुशबू का एहसास कराया।इस अवसर पर अभियान संस्था की ओर से युवा अनुसंधानकर्त्री श्रीमती अनन्याकुमारी सिंह को उनके विशिष्ट कार्यों के लिए ‘स्त्री शक्ति सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
कस्टम्स के पूर्व आयुक्त कमलाशंकर मिश्र ,योगायतन ग्रुप के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह , डॉ शीतलाप्रसाद दुबे और भाजपा नेता अमरजीत मिश्र ने अनन्या सिंह को स्त्री शक्ति सम्मान प्रदान किया। भाजपा नेता विनय त्रिपाठी,जिला उपाध्यक्ष राजेश मिश्रा, उत्तर भारतीय मोर्चा के जिलाध्यक्ष रणजीत सिंह, राकेश सिंह,मनोज सिंह ठाकुर, नत्थूलाल चौरसिया आदि लोग अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के निवर्तमान अध्यक्ष डॉ. शीतलाप्रसाद दुबे के संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम में कजरी के साहित्यिक और सांस्कृतिक पक्ष पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि लोकगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही हमारी सांस्कृतिक स्मृतियों, परंपराओं और लोकभाषाओं के जीवंत दस्तावेज हैं।
कार्यक्रम में देर रात तक कजरी, सोहर सहित विभिन्न लोकगीतों की प्रस्तुतियां होती रहीं और दर्शक मंत्रमुग्ध होकर लोकसंगीत की इस यात्रा में शामिल रहे। मुंबई जैसे महानगर में लगातार 16 दिनों तक लोकभाषा और लोकसंस्कृति को समर्पित यह आयोजन न केवल उत्तर भारतीय लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहा है, बल्कि ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की सांस्कृतिक भावना को भी मजबूत कर रहा है।



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