जौनपुर। अंजुमन हैदरपुर की जानिब से 24 मुहर्रम 1448 हिजरी, 10 जुलाई 2026 (रोज़-ए-जुमा) की शब इमामबारगाह हैदरपुर में जुलूस-ए-अज़ा बराए शहादत हज़रत इमाम ज़ैनुल आबिदीन (अ.स.) का बेहद पुरवक़ार और पुरअसर आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आग़ाज़ रात 8:00 बजे मजलिस-ए-अज़ा से हुआ। सोज़ख़्वानी का शरफ़ जनाब इबाद अली साहब व उनके हमनवाओं ने हासिल किया, जबकि पेशख़्वानी के फ़रायज़ जनाब आक़िल हैदरपुरी एवं जनाब अरसल रज़ा ख़ान हैदरपुरी ने अंजाम दिए। ख़िताबत का शरफ़ अली जनाब मौलाना सैयद नज़र हसन ज़ैनबी साहब क़िब्ला, दिल्ली को हासिल हुआ। इसके बाद मौलाना सैयद आरज़ू हुसैन आबदी साहब क़िब्ला, आजमगढ़, मौलाना जनाब हसन अकबर ख़ान (रन्नो) तथा मौलाना जनाब महताब अब्बास नजफ़ी साहब क़िब्ला ने अपनी असरदार तक़रीरों के ज़रिये फ़रायज़ अंजाम दिए और शहादत-ए-इमाम ज़ैनुल आबिदीन (अ.स.) के पैग़ाम को बयान किया।
मशहूर नौहाख़्वान जनाब फ़रहान ज़ंगीपुरी ने अपने पुरसोज़ नौहों से अज़ादारों की आँखें अश्कबार कर दीं। निज़ामत के फ़रायज़ जनाब नैयर बहिश्ती (जलालपुर) ने बख़ूबी अंजाम दिए। मजलिस के बाद शबीहे ताबूत-ए-इमाम ज़ैनुल आबिदीन (अ.स.), शबीहे इमाम ज़ैनुल आबिदीन (अ.स.) तथा अलम-ए-मुबारक की ज़ियारत कराई गई। इसके बाद अज़ादारों की बड़ी तादाद की मौजूदगी में जुलूस-ए-अज़ा बरामद हुआ। जुलूस के दौरान नौहा-ओ-मातम की सदाओं से पूरा माहौल ग़म-ए-अहलेबैत (अ.स.) में डूब गया और मोमिनीन ने इंतिहाई अकीदत के साथ इमाम ज़ैनुल आबिदीन (अ.स.) को ख़िराज-ए-अकीदत पेश किया।
इस जुलूस में अंजुमन परचम-ए-अब्बास (रन्नो), अंजुमन गुलशन-ए-इस्लाम (भौरा), अंजुमन जाफ़री (जौनपुर) तथा अंजुमन हैदरिया (कोरापट्टी) सहित अंजुमनों ने शिरकत कर अपने पुरसोज़ नौहों और मातम के ज़रिये अज़ादारी का हक़ अदा किया। इस मौके पर अंजुमन हैदरिया, हैदरपुर के ज़िम्मेदारान व अराकीन भी मौजूद रहे, जिनमें जनाब ग़ुलाम अब्बास साहब (जावेद), जनाब ज़ैग़म अब्बास साहब, जनाब शबलू साहब, जनाब शमीम साहब, जनाब ताज साहब, जनाब मिस्टर साहब, जनाब नजमुल हसन साहब, जनाब मज़ाहिर हुसैन साहब, जनाब असलम साहब, जनाब जुगनू साहब, जनाब रज़ा साहब, जनाब ज़ाकिर हुसैन साहब तथा जनाब मोजिज़ हसन (फ़रीद साहब) विशेष रूप से मौजूद रहे और कार्यक्रम के सफल आयोजन में अपना महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।
अंत में अंजुमन हैदरिया, हैदरपुर के ज़िम्मेदारान ने जुलूस में शरीक होने वाले तमाम उलमा-ए-किराम, ज़ाकिरीन, नौहाख़्वानों, अंजुमनों और मोमिनीन का दिल की गहराइयों से शुक्रिया अदा किया तथा दुआ की कि अल्लाह तआला हम सबकी अज़ादारी को अपनी बारगाह में क़बूल फ़रमाए और हमें अहलेबैत (अ.स.) की मोहब्बत व सीरत पर क़ायम रखे। आमीन।


