जौनपुर। हिन्दू धर्म के सर्वोच्च, सार्वभौम धर्मगुरु श्रीऋग्वेदीय पूर्वाम्नाय गोवर्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर श्रीमज्जगद्गुरू शंकराचार्य अनन्त विभूषित स्वामी श्री निश्चलानंद सरस्वती जी महाभाग के भगवत्मय 84वें प्राकट्य दिवस को पुरे देश में प्रत्येक वर्ष की भांति राष्टोत्कर्ष दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।
जौनपुर निवासी स्वामी शंकराचार्य जी के शिष्यों ने अवतरण दिवस पर महाराज जी के द्वारा प्रदत्त गुरुमंत्र , हनुमान चालीसा पाठ एवं राष्टोत्कर्ष के लिए गुरुदेव के संदेशों को प्रचारित प्रसारित करने का संकल्प लिया। प्रोफेसर अखिलेश्वर शुक्ला ने कहा कि-" पुज्य गुरदेव अद्वैत वेदांत और वैदिक गणित के महान् ज्ञाता हैं।
आपके ज्ञान विज्ञान का लाभ प्राप्त करने के लिए समय समय पर इसरो के वैज्ञानिक, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सदस्य,विश्व बैंक , विधिवेत्ता,न्यायाधीश , चिकित्सक, आदि परामर्श के लिए आते रहते हैं। हमारे देश का दुर्भाग्य है कि राजनेता सार्थक लाभ नहीं ले पा रहे हैं। डाक्टर संजय चौबे ने बताया कि महाराज श्री पुरे वर्ष के लगभग 250 दिन भारत भ्रमण में ही देते हैं। पुरीमठ में केवल चतुर्मास के दिन रहते हैं।
ज्यादातर समय राष्टोत्कर्ष के निमित्त भ्रमण में ही रहते हैं। परम् शिष्य बबलू दुबे ने कहा कि सभी सनातनीयो का यह सौभाग्य है कि-सनातन के सर्वोच्च शिखर पर 145 वें शंकराचार्य के रूप में एक ऐसे संत का दर्शन साक्षात्कार हो रहा है , जिनके संदेशों को सरकार यदि गम्भीरता से ले तो भारत को विश्व गुरु बनने से कोई रोक नहीं सकता। "संघे शक्ति कलियुगे" को साकार करते हुए आनन्द वाहिनी, आदित्य वाहिनी द्वारा पुरे देश में लगातार सक्रिय होकर प्रयास किया जा रहा है कि संगठनों का मुख्य आधार "गुरु, ग्रंथ, गोविन्द और गाय होना चाहिए। अन्यथा किसी भी सामाजिक राजनीतिक या सांस्कृतिक संगठनों का होना निरर्थक होगा।

