आजमगढ़। लोक दायित्व संस्था के तत्वावधान में आयोजित ‘रघुभूमि से तपोभूमि तक’ पदयात्रा मंगलवार को दूसरे दिन भी श्रद्धा, अनुशासन और उत्साह के साथ आगे बढ़ी। भगवान श्रीराम के पदचिह्नों से जुड़े स्थलों, मूल सरयू एवं तमसा नदियों के संरक्षण, भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संवर्धन तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश लेकर निकली यात्रा को विभिन्न स्थानों पर नागरिकों का भरपूर समर्थन मिला।
यात्रा के प्रथम दिवस का समापन महाराजगंज स्थित भैरव बाबा धाम में हुआ, जहां श्रद्धालुओं ने यात्रियों का भव्य स्वागत किया। भैरव बाबा की महाआरती में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर यात्रा की सफलता, लोककल्याण और प्रकृति संरक्षण की कामना की।
दूसरे दिन प्रातः भीलमपुर स्थित श्रीराम दरबार मंदिर में भगवान श्रीराम के पूजन-अर्चन के साथ यात्रा का शुभारंभ हुआ। इसके बाद झारखंडे महादेव में जलाभिषेक कर लोककल्याण, पर्यावरण संरक्षण और यात्रा की सफलता के लिए प्रार्थना की गई। बिलरियागंज चौक, मालटारी, चुनहवा और जीयनपुर चौक पर स्थानीय लोगों ने पुष्पवर्षा, माल्यार्पण और ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष के साथ यात्रा का स्वागत किया।
पदयात्रा सलोना ताल स्थित मां काली मंदिर पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। शोध के आधार पर इस स्थल को भगवान श्रीराम के आगमन से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। इसके बाद कंजरा मोड़ और छपरा सुल्तानपुर में भी यात्रा का स्वागत किया गया। पूर्वाह्न करीब 11:45 बजे यात्रा मऊ जनपद की सीमा में प्रवेश कर अपने अगले चरण की ओर बढ़ गई।
यात्रा संयोजक डॉ. पवन कुमार ने कहा कि यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के पदचिह्नों, ऋषि परंपरा, मूल सरयू, लोकसंस्कृति और भारतीय सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण का जन-जागरण अभियान है। उन्होंने कहा कि यात्रा का उद्देश्य सरयू और तमसा नदियों की स्वच्छता एवं अविरलता के प्रति जनचेतना जगाना, ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण तथा नदी तटों पर वृक्षारोपण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है।
यात्रा के दौरान बिलरियागंज में पंकज, रामकिशुन, गोरख, मन्नू और अभिषेक, मालटारी व चुनहवा में सुधीर राय, जीयनपुर में अंजना सिंह, अजमतगढ़ में दिवाकर सिंह व टप्पू सिंह तथा सलोना ताल पर चंद्रमा निषाद सहित स्थानीय कार्यकर्ताओं ने यात्रियों का स्वागत किया। यात्रा में डॉ. पवन कुमार, अलंकार सिंह, सुरेंद्र सिंह, दीनानाथ सिंह, अरविंद सिंह, बबलू विश्वकर्मा, धीरज सिंह, दुर्गेश कौशिक, रामकुमार सिंह, राणा शिवसंत सिंह, मोनू सिंह, शशांक सिंह, उत्कर्ष, सीताराम प्रजापति, अनिल वर्मा, शरद चंद्र अग्रहरि, योगराज पटेल सहित अनेक श्रद्धालु एवं सामाजिक कार्यकर्ता शामिल रहे।



