नया सवेरा नेटवर्क
नई दिल्ली। कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग और अनुसूचित जाति विभाग ने दलित, मुस्लिम और अन्य वंचित समुदायों पर हो रहे कथित अत्याचार के खिलाफ 20 जुलाई से देशव्यापी आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। यह ऐलान इंदिरा भवन में हुई संयुक्त बैठक के बाद सर्वसम्मति से अल्पसंख्यक विभाग के चेयरमैन इमरान प्रतापगढ़ी और एससी विभाग के चेयरमैन राजेंद्र पाल गौतम ने किया । इस आंदोलन में देश भर के अल्पसंख्यक और दलित कम्युनिटी के विधायक व सांसद भी आएंगे ।
इमरान प्रतापगढ़ी ने इसे "इवेंट नहीं, आंदोलन की शुरुआत" बताते हुए कहा कि 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर और संसद के बाहर विशाल प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद इस मुहिम को हर राज्य, जिले और गांव तक ले जाया जाएगा। उन्होंने कहा, "जहां भी नाइंसाफी होगी, हम पीड़ितों के साथ खड़े होकर हर संभव मदद देंगे।" राष्ट्रीय स्तर पर लीगल एडवाइज़र और टास्क फ़ोर्स का गठन किया जाएगा जिससे देश के किसी भी कोने में होने वाले ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आरोपियों पर कार्यवाही के लिए दबाव बनाया जाएगा और मज़लूमों को क़ानूनी मदद की जाएगी।
नेताओं ने कहा कि दलित और अल्पसंख्यक 42 प्रतिशत से ज्यादा आबादी हैं और यह एकता संविधान बचाने की सबसे बड़ी ताकत बनेगी। जून के अंत में उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक और दलित सलाहकार परिषदों की बैठक भी बुलाई जाएगी उसके बाद देश के अलग अलग राज्यों में यह कार्य जारी रहेगा।
इस बैठक में अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय पदाधिकारी व असम राज्य के सह प्रभारी इक़बाल अहमद शामिल हुए। उन्होंने सुझाव दिया कि दलितों, मुस्लिमों और अन्य शोषित वर्गों पर होने वाले ज़ुल्म के खिलाफ दलित-मुस्लिम संगठनों को मिलकर एक मंच से आवाज़ उठानी चाहिए, "बाबा साहेब और गांधी जी के सपनों का भारत बनाने के लिए जाति-धर्म की दीवारें तोड़नी होंगी। दलित-मुस्लिम एकता ही नफरत की सियासत का सबसे बड़ा जवाब है। दिल्ली में जगी यह अलख अब देश के कोने कोने में पहुँचेगी।
इस बैठक में दोनों संगठन के प्रत्येक राज्यों के अध्यक्ष प्रभारी और सह प्रभारी व सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग उपस्थित रहे। बैठक के बाद इक़बाल अहमद ने इमरान प्रतापगढ़ी से मिलकर दलित मुस्लिम एकता बैठक की सफ़लता के लिए बधाई दिए और जुलाई में होने वाले आंदोलन में असम और महाराष्ट्र से बड़ी तादाद में पार्टी कार्यकर्ताओं के शामिल होने की आश्वाशन दिए।
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