इसी पद पर सीतापुर में हुआ स्थानान्तरण
बीएसए ने माना, पढ़ा लिखा है जनपद, पूरे कार्यकाल में मिला भरपूर सहयोग
जौनपुर जनपद का कार्यकाल जीवन में रहेगा अविस्मरणीय
हिम्मत बहादुर सिंह @ नया सवेरा नेटवर्क
जौनपुर। जिले के इतिहास में पहले जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. गोरखनाथ पटेल रहे जिन्होंने लगभग 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा किया। इस दौरान उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, अनुशासन एवं शैक्षणिक माहौल को बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा। वह एक ऐसे जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रहे जिन्होंने शिक्षा महकमा और प्रशासन में तालमेल बैठाकर सुव्यवस्थित ढंग से शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अपने पूरे कार्यकाल में निष्ठा के साथ लगे रहे।
स्थानांतरण सेवाकाल की एक प्रक्रिया : डॉ. गोरखनाथ पटेल
इस दौरान जब उनसे अपने कार्यकाल के दौरान अनुभव का जिक्र किया गया तो उन्होंने कहा कि यह जिला पढ़ा लिखे लोगों का है। लोगों का सम्मान मुझे मिला और मैं भी पूरी कोशिश किया कि महकमे में आने वाले हर व्यक्ति को सम्मान मिले और उनकी समस्याओं का निस्तारण किया जा सके, जिससे किसी शिक्षक या कर्मचारी को बार-बार जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय की दौड़ न लगानी पड़े। उन्होंने कहा कि स्थानांतरण सेवाकाल की एक प्रक्रिया है और इस जनपद में कार्यकाल के दौरान जो स्नेह और प्यार अधिकारियों और जनता एवं शिक्षा विभाग के लोगों का मिला वह हमारे जीवन में अविस्मरणीय रहेगा।
सेवाकाल तक चलता रहेगा लोगों से संबंध : डॉ. गोरखनाथ पटेल
उनका मानना है कि स्थानान्तरण भले ही इस जनपद से सीतपुर जिले में इसी पद पर हुआ है लेकिन जिन लोगों से संबंध बन चुका है। वह सेवाकाल तक चलता रहेगा। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने शिक्षा की बुनियादी चीजों को परखा और उस पर फोकस करके टीम भावना से लोगों को साथ लेकर बेहतर कार्य करने की एक लकीर खीचीं जिससे अन्य आने वाले अधिकारी भी उस दिशा में कार्य करें जिससे जनपद में शिक्षा व्यवस्था और मजबूत हो। अपने कार्यकाल के दौरान शिक्षक नेताओं को भी साथ लेकर चलने में पीछे नहीं रहे और हर आने वाले लोगों को उनको सम्मान देने में भी पीछे नहीं रहे।
शालीन स्वभाव, विनम्रता और मृदुभाषी हैं डॉ. गोरखनाथ पटेल
निरीक्षण के दौरान जब बीएसए डॉ. गोरखनाथ पटेल जब विद्यालयों में पहुंचते थे तो मातहतों को अच्छे ढंग से कार्य करने के निर्देश देते थे, लेकिन लगभग 5 वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने न जाने कितने लापरवाह कर्मचारियों को राइट टाइम कर दिया। इसके साथ ही बच्चों के साथ एक अभिभावक की तरह व्यवहार किया और उनके साथ जमीन पर बैठकर मिड डे मील का भोजन किया। बच्चों को कभी यह एहसास नहीं होने दिया कि वह बेसिक शिक्षा विभाग के जिले के सबसे बड़े अधिकारी है। बच्चों से बड़े प्रेम से मिलते और उनसे सवाल पूछते और उन्हें शाबाशी देते।
शिक्षक नेताओं के सहयोग से विद्यालयों को बनाया बेहतर
बीएसए डॉ. गोरखनाथ पटेल ने विभिन्न शिक्षक संघ के नेताओं से वार्ता कर सबसे पहले उन्हीं के विद्यालयों को सुधारने की बात कही। उन्होंने कहा कि सबसे पहले शिक्षक नेता अगर अपने विद्यालय को अच्छा बनाएंगे तो उनकी नकल करके उनके सहयोगी भी अपने अपने विद्यालयों को चमकाने का काम करेंगे। यही वजह रही कि जौनपुर के न जाने कितने विद्यालय है जो प्राइवेट विद्यालयों को भी पीछे छोड़ रहे हैं। जिले के सभी शिक्षक नेताओं के विद्यालय आज अगर चमक रहे हैं और वहां पर अच्छी व्यवस्था है तो इसका श्रेय बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. गोरखनाथ पटेल को जाता है। इन विद्यालयों में पढ़ने वालों की संख्या सैकड़ों में हैं और अभिभावक भी ऐसे विद्यालयों से बहुत खुश रहते हैं।
जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय को मिली कई उपलब्धियां
बीएसए डॉ. गोरखनाथ पटेल के कार्यकाल में अंतरप्रांतीय, अंतरजनपदीय के साथ साथ प्रदेश स्तर पर विभिन्न प्रतियोगिताएं हुईं। खेल प्रतियोगिताओं में बच्चों ने बेहतर प्रदर्शन किया। जिसका नेतृत्व डॉ. गोरखनाथ पटेल ने किया। खेल प्रतियोगिता में कई ट्रॉफी, अवार्ड बच्चों ने जीते और इसका श्रेय अपने गार्जियन डॉ. गोरखनाथ पटेल को दिया। वह बच्चों से हमेशा कहते हैं कि पढ़ाई के साथ साथ खेल भी जरूरी है। इसके लिए उन्हें जो भी करना पड़ेगा वह बच्चों के लिए करेंगे और किया भी। शायद यही वजह रही है कि बच्चों ने पूरो मनोयोग के साथ पढ़ाई भी की और विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं में भाग लेकर विजेता भी बने।
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