शीर्षक : दुःख का स्वभाव

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शीर्षक : दुःख का स्वभाव


दुःख का स्वभाव

तुम्हें कई बार लगेगा
कि दुःख का स्वभाव है..
फैलते जाना।
वह कमरे की नमी की तरह
हर वस्तु पर उतर आएगा,
और तुम्हें विश्वास हो जाएगा
कि अब इसी तापमान पर
जीवन बीतेगा।

तुम्हें लगेगा
कि भीतर जो अंतिम फूल था,
वह भी अपनी ऋतु पूरी कर चुका है,
कि बाग़ ने,
पतझड़ को स्थायी सदस्य बना लिया है।
लेकिन वृक्ष
अपने सूखे दिनों को
भविष्यवाणी नहीं मानते।

वे जानते हैं,
पत्तियाँ अवश्य लौटेंगी
यह अनुपस्थिति अस्थायी है
मनुष्य यह बात
हर बार भूल जाता है।
इसलिए हर दुःख में
उसे अंत दिखाई देता है,
और हर वसन्त
उसे चमत्कार लगता है।

जबकि सच तो यह है कि
परिवर्तन किसी आशा का परिणाम नहीं,
यह भी उतनी ही स्वाभाविक है,
जितना जन्म,
और उतनी ही निश्चित,
जितनी मृत्यु।

मनीषा पाण्डेय
(कवयित्री एवं लेखिका, बेंगलुरु)

OPD Start : अशोक हॉस्पिटल महरुपुर वाराणसी-जौनपुर रोड जफराबाद जौनपुर | Emergency Contact : 7565955001, 7575955002
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