प्रेग्नेंसी में हो रही देरी तो IVF के पहले जानिए दूसरे विकल्प

Naya Savera Network
IVF उन निःसंतान दम्पत्तियों के लिए वरदान है, जिनके लिए संतान प्राप्ति के सारे दरवाज़े बंद हो गए हो।
आजकल शादी के छ महीने बाद ही दंपत्ति Ivf के बारे में गुगल करने लगते हैं।
नतीज़ा उन्हें उसीसे संबंधित फीड भी मिलते रहते हैं। जिससे डॉक्टर के पास पहुंचने के पहले ही उनका झुकाव ivf की तरफ़ ही रहता है।
 आधुनिक तकनीक और ए आई की वजह से ivf की सफलता दरों में भी वृद्धि हुई है। पहले जहां  ३५ वर्ष से कम आयु में सफलता दर २० से ३० % था अब ५० से ६०% हो गया है। इसकी सफलता दरों में वृद्धि की एक वजह ये भी है कि अब लोग जल्दी ही धैर्य खो देते हैं और सीधे ivf का रुख अपनाते हैं।
बीतें 30वर्षों में ivf से इलाज कराने वालों की संख्या 200% बढ़ी है।
Ivf से जुड़ी स्वास्थ संबंधी प्रमुख जटिलताओं और दूसरे आसान रास्तों को समझ कर ही फैसला लेने में समझदारी है।
१) पहला तो ivf अत्यंत ही खर्चीला रास्ता है  और गर्भाधान के पहले और उसके बाद  पूरे  ९ महीने तक दवाईयों व सुइयों का सिलसिला शारीरिक और मानसिक रूप से थका देने वाला होता  है।
२)Ivf प्रक्रिया में प्राकृतिक गर्भाधान की तुलना में इन परिस्थितियों की ज़्यादा सम्भावना होती है - मल्टीपल व  एक्टोपिक प्रेग्नेंसी, जेस्टेशनल डायबिटीज़, OHSS, प्रीइकलंपशिया , मूड स्विंग्स , गैस या एसिडिटी, ब्लोटिंग , मोटापा।
३) ज़रूरी नहीं कि एक बार में ही सफ़लता हाथ लगे , ऐसे में कई कई चक्रों से होकर गुज़रना पड़ सकता है।
४) ivf के स्थायी स्वास्थ जटिलताओं पर गहन अध्ययन ज़ारी है। कुछ स्थाई जटिलताओं में borderline ovarian tumour प्रमुख है।

 इन सभी तकलीफों के बाद जब संतान प्राप्ति होती है तो अपार सुख की अनुभूति भी होती है। 
परंतु इतना सब होने पर भी यदि आप असफल होते हैं, तो अवसाद आपका स्थाई भाव भी हो सकता है।संतान प्राप्ति की दिशा में सबसे पहला प्रयास आपकी स्वस्थ जीवन शैली व समय रहते विवाह है और ये दोनों ही आजकी भागदौड़  भरी ज़िदंगी में उपेक्षित हो रहे हैं।
दूसरा कदम अपने नज़दीकी रजिस्टर्ड स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलें।
जहां आपके आरंभिक जांचों के साथ शुक्राणुओं और अंडाणुओं की गुणवत्ता बढ़ाने या ओवुलेशन से संबंधित दवाईयां दी जा सके। ज़रूरत पड़ने पर, IUI या लैप्रोस्कोपिक प्रक्रिया द्वारा गर्भधान को आसान  बनाया जा सकता है। 
इन प्राथमिक और कम आक्रामक उपचारों से सफ़लता न मिलने पर ही आई वी एफ़ को अंतिम विकल्प के रूप में चुनें।

 इन सभी बातों में सबसे प्रमुख आपकी स्वस्थ जीवन शैली है । इसके लिए ज़रूरी है आप प्राकृतिक और पौष्टिक आहार लें , नियमित व्यायाम करें व मोटापे से बचें। जंक फूड और फास्ट फूड से बचें, प्लास्टिक में खाने पीने से परहेज़ करें।
परफ्यूम्स या अन्य केमिकल कॉस्मेटिक्स से बचें।
धूम्रपान, शराब अथवा अन्य नशे से मुक्त रहें।

कई बार ऐसा भी होता है कि IVF फेल होने पर बिना किसी उपक्रम के सिर्फ़ जीवन शैली में सुधार करके गर्भधान हो जाता है।  इससे पता चलता है कि, आपकी जीवन शैली का  आपके शरीर पर कितना असर पड़ता है। 
ऐसे में रहीम दास जी का एक बहुत ही लोकप्रिय दोहा याद आया 
:रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि।जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तरवारि॥
डॉ कंचन मिश्रा ,
MBBS, DGO, PGDS
स्त्रीरोग विशेषज्ञ 
डायरेक्टर,
जगदीश ई न टी एंड मैटरनिटी क्लिनिक 
(पूर्व चिकित्सक डफरिन अस्पताल प्रयागराज)
सचिव अथर्वन फाउंडेशन

Admission Open 2026-27  Nehru Balodyan Sr. Secondary School  Kanhaipur, Jaunpur  Contact 9415234111, 9415349820, 94500889210
विज्ञापन

Admission Open - Session: 2026-27 | D.B.S. Inter College (10+2) Affiliated | Kadipur, Ramdayalganj, Jaunpur | Contact-9956972861, 9956973761
विज्ञापन

प्रवेश प्रारम्भ-सत्र 2026-27 : निर्मला देवी फार्मेसी कॉलेज | नयनसण्ड, गौराबादशाहपुर, जौनपुर, उ०प्र० |  Mob.: 9125018998, 9415234998
विज्ञापन

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!