श्रद्धापूर्वक मनाया गया हरि प्रबोधिनी एकादशी का पर्व | #NayaSaberaNetwork

Team NSN
  • घर में मंडप बनाकर हुआ तुलसी पूजन
नया सबेरा नेटवर्क
जौनपुर। हरि प्रबोधिनी एकादशी का पर्व बुधवार को श्रद्धा पूर्वक परम्परा गत रूप से मनाया गया। श्रद्धालुओं ने एकादशी पर व्रत रखा। परम्परानुसार दीपावली की तरह शाम होते ही अनेक घर की मुडेर दीपक से सजाए गए। मोमबत्ती जलाकर लोगों ने प्रकाश पर्व मनाया। गन्ना चूसकर नेवान की परम्परा का निर्वहन किया गया।
श्रद्धापूर्वक मनाया गया हरि प्रबोधिनी एकादशी का पर्व | #NayaSaberaNetwork


हरि प्रबोधिनी एकादशी को देवोत्थान एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। पर्व को देखते सुबह श्रद्धालुओं ने आदिगंगा गोमती में डुबकी लगाई। स्नान के बाद लोगों ने दान-पुण्य किया। अधिकांश लोगों ने उपवास रखकर फलाहार किया। इस उपलक्ष्य में लोगों ने गन्ना तथा नए गुड़ का सेवन किया। बच्चों व युवकों ने गन्ना चूसने का भरपूर आनन्द उठाया। मान्यता के अनुसार चार माह पूर्व आषाढ़ मास की हरि शयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चातुर्मास शयन को चले गए थे। आज कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की एकादशी अर्थात् देवोत्थान एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु योग निद्रा से जागृत हुए। परम्परानुसार एकादशी पर तुलसी विवाह का विशेष प्रावधान है। परम्परा के अनुसार लोगों ने शाम को गन्ना चूसकर नेवान किया। विधान के अनुसार एकादशी से पूर्णिमा तक तुलसी विवाह सम्पन्न कराया जाता है। ज्योतिष व वास्तु विशेषज्ञ डा.टीपी त्रिपाठी के अनुसार देवोत्थान एकादशी को तुलसी विवाह का महत्व ही कुछ और है। बाकी पूर्णिमा तक लोग यह कार्य करते हैं।

दीपावली जैसा रहा महौल
जौनपुर। हरि प्रबोधिनी एकादशी को दीपालवी जैसा माहौल रहा। बहुत से लोगों ने दीपावली की तरह अपने घरों के मुडेरों पर मोमबत्ती व झालर लगाकर ज्योति पर्व मनाया। परम्परानुसार जिनके घर दीपावली को किन्हीं कारणों बस दीप नहीं जलाए जाते उनके घर एकादशी को दीपोत्सव मनाया जाता है। जैसे जब किसी के घर दीपावली के दिन किसी की मृत्यु हो जाती है तो उनके घर उसी समय से दीपावली नहीं मनाई जाती। ऐसे लोग देवोत्थान एकादशी के दिन दीपावली की तरह दीया जलाते हैं। बच्चों ने पटाखा जलाकर आनन्द लिया। युवतियों, महिलाओं व बालिकाओं ने घर आंगन में रंगोली सजाई।

घर में मंडप बनाकर हुआ तुलसी पूजन
जौनपुर। तुलसी पूजन के लिए घर के आंगन या छत पर शाम को गन्ने का मंडप बनाया गया। उसी मंडप में तुलसी का पौधा व भगवान विष्णु का चित्र या प्रतिमा रख कर पूजन किया गया। तुलसी पूजन का कार्य शाम को 5:20 बजे प्रदोष काल समाप्त होने के बाद शुरू हो गया। महिलाओं ने तुलसी व शालिग्राम का विवाह सम्पन्न कराया। विवाह के अलावा मांगलिक गीत गाए गए। वैसे देवोत्थान एकादशी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक तुलसी पूजन किया जाता है। उधर शाम को किसानों ने गन्ने के खेत में 'थान' पूजन किया। कहीं कहीं सुबह ही थान पूजन किया गया। एकादशी पर्व के दिन बाजारों में सुबह से ही गन्ना की बिक्री शुरू हो गई थी। लोगों ने नेवान के लिए जमकर गन्ने की खरीददारी की। इसी प्रकार सफेद और लाल कन्दा भी खूब बिका।

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