#JaunpurLive : रुद्राक्ष अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र - भारत जापान दोस्ती का प्रतीक, काशी क्योटा बनेगा - सर्व विधा संस्कृति की राजधानी को नायाब तोहफा



भारतीय संस्कृति, कला, आध्यात्मिकता, धर्म पर पूरी दुनिया आकर्षित है - रुद्राक्ष इस कड़ी में अनमोल उपलब्धि - एड किशन भावनानी
गोंदिया - वैश्विक रूप से भारत की उपलब्धि आस्था, आध्यात्मिकता, संस्कृति, संस्कार, भावपूर्णता, सर्वधर्म सम्मान,औरधर्मनिरपेक्षता के रूप में रही है। हालांकि अभी भारत तकनीकी, स्वास्थ्य, रक्षा, डिजिटलाइजेशन, शिक्षा, इत्यादि क्षेत्रों में भी विश्व में प्रतिष्ठित हो गया है। हम देखते हैं कि अभी भारत की गिनती बड़े विकसित देशों के साथ होती है। हर बड़े बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भारत को विशेष दर्जा दिया जाता है, आमंत्रित किया जाता है। कुछ वर्षों से भारत का आगाज़ विश्व स्तर पर विस्तृत हुआ है। भारत ने बड़े-बड़े देशों के साथ इस तरह का कदम उठाया है, याने ऐसे बीज बोए हैं कि आज हमको उसका फल मिल रहा है। चाहे को कोविड-19 में वैश्विक स्तर पर सहयोग हो या अन्य क्षेत्रों में, कुछ अपवाद को छोड़ दें तो भारत को सकारात्मक सहयोग, उत्साह मिल रहा है।...साथिया बात अगर हम दिनांक 15 जुलाई 2021 विश्व युवा कौशल दिवस पर रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र की करें तो, जापानी डेलीगेट्स की मौजूदगी में पीएम ने वाराणसी को जापान और भारत के दोस्ती की मिसाल रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर सौंपी। इस दौरान जापान के पीएम भी वर्चुअल तरीके से इस समारोह में मौजूद रहें और उनका एक वीडियो संदेश भी बड़ी से स्क्रीन पर डिस्प्ले किया गया। पूरे रुद्राक्ष परिसर में इंडो-जापानी कला, संस्कृति, शैली की झलक दिखाई दी। वाराणसी से जापान और भारत के रिश्तों को मजबूती मिलेंगी। यही वजह है कि भारत और जापान के इन रिश्तों को मजबूत करने के लिए भारत और जापानी व्यंजनों के साथ-साथ दोनों देशों की संस्कृति की झलक भी रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में देखने को मिली।...साथियों बात अगर हम इस रुद्राक्ष अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र की करें तो 2015 में बनी थी रूप रेखा। सर्व विद्या की राजधानी काशी में धर्म, अध्यात्म, कला संस्कृति और विज्ञान पर चर्चा होती है, तो इसका सन्देश पूरी दुनिया में जाता है। काशी में संगीत के सुर, लय और ताल की त्रिवेणी अविरल बहती रहती है।...साथियों 2015 में वाराणसी को यूनेस्को ने सिटीज ऑफ म्यूजिक से नवाजा था और 2015 में ही जापानी पीएम शिंजो आबे के काशी दौरे के दौरान इस दोस्ती की मिसाल की रूपरेखा भी भारतीय पीएम  ने तैयार की थी। रुद्राक्ष को जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी ने फण्ड किया है। इसकी डिजाइनिंग जापान की कंपनी ओरिएण्टल कंसल्टेंट ग्लोबल ने ही की है और निर्माण का काम भी जापान की फुजिता कॉरपोरेशन नाम की कंपनी ने किया है। व्यतनाम स्किल्ड कुर्सियां इत्यादि,इसका निर्माण 10 जुलाई 2018 को शुरू हुआ था और मार्च 2021 में यह बनकर तैयार हो चुका है...। साथियों हम सबको याद होगा कि जब 2015 में जापान के पीएम शिंजो आबे भारत यात्रा पर आए थे तो पीएम ने उन्हें काशी लेकर आए थे और उन्हें वहां खूब आनंद महसूस हुआ था। दुनिया के सबसे प्राचीन और जीवंत शहर काशी को जापान ने भारत से दोस्ती का एक ऐसा नायाब तोहफ़ा रुद्राक्ष के रूप में दिया है, जहां आप बड़े म्यूजिक कंसर्न ,कांफ्रेंस,नाटक और प्रदर्शनियां  जैसे कार्यक्रम दुनिया के बेहतरीन उपकरणों और सुविधाओं के साथ कर सकेंगे। शिवलिंग की आकृति वाला वाराणसी कन्वेंशन सेण्टर जिसका नाम शहर के मिज़ाज के अनुरूप रुद्राक्ष है। इसमें स्टील के एक सौ आठ रुद्राक्ष के दाने भी लगाए गए है। जितना खूबसूरत ये देखने में  लग रहा है ,उतनी ही इसकी खूबियां भी है। काशी के सिगरा में, तीन एकड़ में, 186 करोड़ की लागत से बने  रुद्राक्ष में 120 गाड़ियों की पार्किंग  बेसमेंट में हो सकती है। ग्राउंड फ्लोर और प्रथम तल को लेकर हाल होगा जिसमे वियतनाम से मंगाई गई कुर्सियों पर 1200 लोग एक साथ बैठ सकते है। दिव्यांगों के लिए भी दोनों दरवाजो के पास 6-6 व्हील चेयर का इंतज़ाम है। इसके अलावा शैचालय भी दिव्यांगों फ्रेंडली बनाए गए है। हाल में बैठने की छमता पार्टीशन से कम या ज़्यादा भी किया जा सकता है। इसके अलावा आधुनिक ग्रीन रूम भी बनाया गया है। 150 लोगों की छमता वाला दो कॉन्फ्रेंस हाल या गैलरी  भी है। जो दुनिया के आधुनिकतम उपकरणों से सुसज्जित  है। इस  हॉल को भी जरूरत के मुताबिक घटाया और बढ़ाया जा सकता है यह जानकारी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से मिली।... साथियों पीएम ने अपने ट्विटर हैंडल से 14 जुलाई देर शाम ही काशी जाने की जानकारी शेयर की थी।...साथियों बात अगर हम पीएम के दिनांक 15 जुलाई 2021 विश्व युवा कौशल दिवस पर काशी दौरे की करें तो अपने संबोधन में कहा काशी को 1500,करोड़ की सौगात, बाबा विश्वनाथ मां गंगा की पूरे काशी में एलईडी के माध्यम से आरती का सीधा प्रसारण, दशहरी लंगड़ा आम का यूरोप खाड़ी देशोंमें निर्यात,डीजल वाली नाव का एसएनजी में परिवर्तन इंफ्रास्ट्रक्चर पैकेज, वैक्सीनेशन अभियान की तारीफ सहित अनेक बातों का उल्लेख किया।इस परियोजना का मकसद काशी में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में लोगों को सामाजिक और सांस्कृतिक संवाद का मौका देना है। काशी से जापान और भारत के रिश्तों को मजबूती मिलने जा रही है। यही वजह है कि भारत और जापान के इन रिश्तों को मजबूत करने के लिए भारत और जापानी व्यंजनों के साथ-साथ दोनों देशों की संस्कृति की झलक भी रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में देखने को मिली और काशी को क्योटा बनाने पर संकल्पित हैं।अतःअगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करेंगे तो हमें महसूस होगा कि रुद्राक्ष अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र भारत जापान दोस्ती का प्रतीक रहेगा सर्व विद्या संस्कृति की राजधानी को नायाब तोहफा मिला भारतीय संस्कृति कला आध्यात्मा धर्म पर पूरी दुनिया कशिश है रुद्राक्ष इस कड़ी में अनमोल उपलब्धि साबित होगा।

 


from NayaSabera.com

Comments