हमारे देश भारत में कभी कभी प्रशासन और प्रशासनिक अधिकारी वह काम करते हैं।जो दुनिया में शायद कहीं नहीं होता होगा।ऐसे कारनामों से इतिहास भरा पड़ा है।यहाॅं हम कुछ इसी तरह का जिक्र करने जा रहे हैं।जो हमारे संविधान की धज्जियां उड़ा रहे हैं। बात उस समय की है जब उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह की सरकार आई थी। इनकाउंटर का दौर चल रहा था। पोलिस वाले अपराधियों को बिल में से खींच खींच कर मार रहे थे।उस दौर में श्रीप्रकाश शुक्ल का इनकाउंटर खूब सुर्खियां बटोरा था।उसी दौरान पोलिस वालों ने धनंजय सिंह को भी निपटाने का ऐलान कर दिया।बाद में पता चला ए तो एक मजदूर है। कल्याण सिंह की बड़ी किरकरी हुई।मगर किरकरी ही हुई बाकी कुछ नहीं हुआ।हाॅं लीपा पोती करके मामला रफा-दफा कर दिया गया।
दूसरी घटना भी उत्तर प्रदेश से ही है। मुलायम सिंह यादव जी की सरकार थी। चुनाव हो रहा था।नेताओं और उनके समर्थकों का बूथ दर बूथ दौरा चल रहा था।एक बूथ पर नीरज मिश्र जी भाजपा के जिला अध्यक्ष थे।अपनी पार्टी की तरफ से मोर्चा सम्हाले हुए थे। अखिलेश यादव तब उनकी पहचान केवल मुलायम सिंह यादव के पुत्र के रूप में ही थी। वो अपने पिता के समर्थकों साथ उस बूथ पर पहुॅंचे।नीरज मिश्र से कहासुनी हुई। राजकुमार अखिलेश इतने नाराज़ हुए कि राजा मुलायम सिंह से नीरज का शीश माॅंग लिए।राजा भी आव देखे न ताव नीरज मिश्र का शीश काटकर राजकुमार को भेंट कर दिए।नीरज मिश्र की बाडी आजतक नहीं मिली।न कोई एफआईआर न कोई मुकदमा न कोई सुनवाई।फैंसला आन दि स्पाट।यह सब हो रहा है संविधान के चलते।
तीसरी घटना है महाराष्ट्र की विलासराव देशमुख जी की सरकार थी।राज ठाकरे शिवसेना से अलग होकर अपने को चमकाने के लिए परप्रांतीय का मुद्दा खूब गरम किए।बिहार निवासियों को विशेष रूप से लक्षित किये।जहाॅं देखो वहीं उनके समर्थक रिक्शा वाले भाॅंजी वाले,फेरी वाले, विशेषतः जो कमजोर वर्ग के थे उनको मार रहे थे मुम्बई से भगा रहे थे। कांग्रेस सरकार ऐक्शन में आई और राज ठाकरे की सुरक्षा वापस ले ली।कुछ ही दिन बीते थे कि एक निरपराध बिहारी युवक को इनकाउंटर में मार दिया गया।बताया ये गया कि वह राज ठाकरे को मारने जा रहा था।दिन के १० से ११ बजे के बीच में उसने वह बस हाईजैक की जिसमें सुबह से रात बारह बजे तक सरसों डाल दो तो बस की फर्श पर पहुॅंचने में उसे मसक्कत करनी पड़ती है।ऐसी बस को उसने हाईजैक कर लिया वो भी जरमरी जैसे व्यस्ततम इलाके में मुम्बई पुलिस ने बहादुरी दिखाते हुए उस युवक का इनकाउंटर कर दिया।इतना सटीक निशाना कि एक भी पैसेंजर को एक छर्रा तक नहीं लगा।मरने और घायल होने की तो बहुत दूर की बात है।जब हम उस घटना पर गहरी नज़र डालते हैं तो अजूबा के अलावा कुछ नहीं लगता।यह अपने आप में पहला ऐसा इनकाउंटर था,जिसमें अपराधी के सिवा किसी का बाल तक बांका नहीं हुआ।जबकी मरने की सम्भावना तो कइयों की थी।है न कमाल की बात।और राज ठाकरे को पुनः सुरक्षा गार्ड भी मिल गये।इसी तरह सुशांत सिंह राजपूत भी राजनीति की बलि चढ़ा दिए गये।अपराधी आज भी राजसुख भोग रहे हैं।यह घटना भी अजूबा ही थी।रमेश किणी को भी मार दिया गया।वह राजनीति का शिकार बना।उसका भी हत्यारा राजसुख भोग रहा है।मुकेश अंबानी के घर का किस्सा अभी बहुत पुराना नहीं हुआ है।उनके घर के सामने जिलेटिन राड से भरी जो स्कार्पियो गाड़ी जब्त की गई थी,उसके मालिक का शव नई मुम्बई की खाड़ी में मिला।वहाॅं भी लीपापोती हो गई।मुख्य अपराधी आज भी राजसुख भोग रहे हैं।एक ट्रैफिक पुलिस की हत्या जनसेवकों ने मिलकर कर दी।वह भी मामला रद्दी के ढेर में दब गया।उस पुलिस वाले की गलती इतनी थी कि उसने जनसेवकों की गाड़ी रुकवा दी थी।ऐसी विचित्र अप्रत्याशित घटनाओं से हमारे देश का इतिहास भरा पड़ा है।
ऐसी ही एक घटना आज बिहार से आई है।जो चर्चा का विषय बनी हुई है।सोशल मिडिया पर बिहार प्रशासन की किरकिरी कर रही है। हुआ यूॅं है कि एक युवक जो समाज की विसंगतियों को दूर करने में लगा था।प्रशासन का कान खींच रहा था।उसे बिहार पुलिस ने मानसिक रोगी कहके मार दिया।यह दुनिया का दसवां अजूबा है।आज तक कहीं न सुना होगा न देखा होगा कि किसी मानसिक रोगी का इनकाउंटर हुआ हो।मानसिक रोगी जानवर को भी नहीं मारा जाता।यह तो मनुष्य था।यदि वह मानसिक रोगी था तो उसे पागलखाने भेजना चाहिए था। लेकिन ऐसा कुछ न करके सीधे इनकाउंटर।यह दुनिया का पहला मामला है।और शायद यह बिहार में ही हो सकता था। इसलिए बिहार में हुआ।वैसे बिहार अजूबा राज्य है भी। यहीं बिना पढ़े को टापर घोषित कर दिया जाता है।तो पढ़ें लिखे को मानसिक रोगी बताना बिहार में कोई अचरज नहीं है।हाॅं और के लिए है। उपरोक्त लिखित बातों पर जब गौर करते हैं तो गोस्वामी तुलसीदास जी की यह चौपाई आज भी उतनी ही चरितार्थ है जितनी की शायद तब थी।
समरथ के नहिं दोष गुसाईं।
रवि पावक सुरसरि की नाईं।।
मतलब ए कि राजा किसी भी देश व राज्य का सर्वोपरि होता है।मगर उसके ऊपर भी एक राजा है,उसका सबको ध्यान रखना चाहिए।वो हिसाब सबका करता है।यहाॅं स्थिर कोई नहीं है।नम्बर सबका आता है। इसलिए सरकारें जो भी करें।उसका मजबूत आधार होना चाहिए।बिलाशराव देशमुख भी ऐसे ही एक बिहारी को मरवा दिए थे।आज वो न तो खुद हैं न सत्ता है।ऐसे ही बहुत से मगरूर अहंकारी राजा हुए,उनका कोई नाम लेने वाला नहीं बचा। मुलायम सिंह ने भी एक निर्दोष विप्र का गला काटकर भेंट किए थे बेटे को।वही बेटा गला पकड़कर कुर्सी से नीचे कर दिया।ए गला काटने से भी पीड़ादायक है। कांग्रेस को अहंकार था कि हम कभी सत्ता से जायेंगे ही नहीं।विप्र द्रोह किया।गये। अरविंद केजरीवाल दो चुनाव क्या जीते पगला गये।वो भी गये।ममता को भी अहंकार हो गया वो भी गईं न।एम के स्टालिन को भी वहम हो गया था।वो भी गये।ए सब विप्र द्रोह करके ही गये।इसलिए हम आगाह करते हैं।
दबी हुई आग को भड़काइए मत।
चिन्गारी को शोला बनाइए मत।।
शोले जला राख कर देंगे सबकुछ।
सोये हुए शेरों को जगाइए मत।।
पं.जमदग्निपुरी
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