विज्ञान और अध्यात्म के मेल से समाज को मिलती है नई ऊर्जा

 नया सवेरा नेटवर्क

 विज्ञान और अध्यात्म के मेल से समाज को मिलती है नई ऊर्जा

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मुम्बई। अणुशक्ति नगर  में जागृति समिति के तत्वावधान में -22 जनवरी से समय सायं 5 से 9 बजे तक पंच दिवसीय श्रीराम कथा चल रही है। कथा व्यास आचार्य डाॅ माधवदत्त पाण्डेय राम कथा की व्याख्या बहुत ही सुंदर ढंग से कर रहे हैं। वैज्ञानिकों की दुनियाँ अणुशक्ति नगर में इस पावन राम कथा का आयोजन हमारे देश के बहुत सुंदर सामाजिक भविष्य की अचल संरचना है। विज्ञान और अध्यात्म का जब मेल होता है तो एक नई चेतना समाज को मिलती है। व्यास जी ने इस कथा के महिमा को इस तरह बताया कि इसमें मानवीय जीवन जीने वाले लोग रमण करने लगते हैं। मानवीय जीवन में जब भी अवसर मिले सत्संग अवश्य करते रहना चाहिए । सत्संग से भक्ति और भक्ति से भगवान मिल जाते हैं। व्यास जी ने बड़े ही सरल ढंग से हम मनुष्यों को ईश्वर को पाने का रास्ता बता दिया। आज के समय को कलयुग कहा गया है। इस युग में मनुष्य का सामाजिक पतन हो रहा है इसका मुख्य कारण अच्छे सत्संग की कमी है । व्यास जी कहते हैं कि जिस मनुष्य का संग ही गड़बड़ हो उसका जीवन व्यर्थ हो जाता है अर्थात् वह मनुष्य पातन की ओर जाने लगता है । संगत से हमारे कर्म भी उसी तरह होने लगते हैं । इसलिए विद्वान एवं विशिष्ट लोगों की संगति करनी चाहिए। संतसंग के विषय में तुलसीदास जी द्वारा रचित चौपाई को उन्होंने बड़े ही सुंदर ढंग से समझाते हुए बताया कि दो पाषाण है जिसमें से एक रास्ते पर पड़ा है और रोज ना जाने कितने पैरों के नीचे आता है। और वहीं दूसरा पाषाण मंदिर में प्रतिष्ठित होकर मनुष्यों द्वारा ईश्वर रूप में पूजा जाता है । इसका कारण क्या है दूसरा पाषाण विद्वान के संगत में आने की वजह से देवत्व के रूप में आ गया । इसी में आगे बताते हुए उन्होंने हमारे वर्तमान समय में नव विवाहितों के झगड़े और घर टूटने के मामले को भी सती और शिव के संवाद से समझाया कि विवाह सिर्फ दो शरीर का नहीं बल्कि दो आत्माओं का मिलन होता है । दो कुलों का मेल और आने वाली पीढियों को भी यह वैवाहिक जीवन जोड़ती है । परस्पर विश्वास ही वैवाहिक जीवन का मूलभूत मंत्र है । दांपत्य जीवन में धर्म का बहुत ही महत्व है। जो दंपति धर्म के पथ पर चलते हैं वह एक सुखी समाज का निर्माण करते हैं । उनके जीवन में कठिनाई तो आती है पर वह सुगमतया उससे पार हो जाते हैं । कथा में जीवन के सारे पड़ावों के बारे में बताया गया है । राम कथा को व्यास जी ने एक ऐसा सागर बताया जिसमें से हर व्यक्ति अपने अनुरूप शिक्षा रत्न ले सकता है । भगवान् की कथाएँ मानवीय जीवन के मूल्यों को प्रदान करती हैं । अतः भगवान की कथाओं को जो पूरी श्रद्धा से सुनते हैं तथा उसके जीवन मूल्यों को अपने लिए आत्मसात करते हैं उनका कल्याण अवश्य ही होता है। रामकथामयी पवित्र वातावरण के इस अवसर पर जागृति समिति के विशिष्ट संचालक श्रीविनोद मिश्रा , श्रीबलवंत सिंह श्री स्वामीनाथ. श्री बी एन मिश्रा , एस के गोयल सी पी सिंह एवं संतोष दुबे के साथ समिति के अन्यान्य सदस्यगण के साथ अणुशक्ति नगर के अत्यधिक प्रबुद्ध श्रोतागण उपस्थित रहे।

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