विरेन्द्र यादव @ सरायख्वाजा, जौनपुर। आज ही के दिन 1780 में भारत का प्रथम समाचार पत्र 'हिक्की बंगाल गजट' का प्रकाशन शुरू हुआ था। इस ऐतिहासिक उपलब्धि की स्मृति में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग ने संगोष्ठी किया।
संगोष्ठी में जनसंचार विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि जेम्स ऑगस्टस हिक्की द्वारा शुरू किया गया यह पत्र एशिया का पहला मुद्रित समाचार पत्र था। हिक्की बंगाल गजट ने न केवल खबरें दीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता का माध्यम भी बना। बाजार भाव, शादियां और राजनीतिक विश्लेषण से भरपूर यह पत्र सत्ता के विरुद्ध सत्य बोलने का प्रतीक था। यह बात दीगर है कि दो साल में अखबार बंद हो गया। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे वर्तमान पत्रकारिता के दौर में हिक्की के साहस से प्रेरणा लें।
जनसंचार विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर दिग्विजय सिंह राठौर ने कहा कि हिक्की गजट ने ईस्ट इंडिया कंपनी के भ्रष्टाचार के विरुद्ध साहसी पत्रकारिता की मिसाल कायम की। "हिक्की का नारा 'सभी के लिए खुला, लेकिन किसी से प्रभावित नहीं' आज भी प्रेस स्वतंत्रता का मूलमंत्र है।" दो पेज के अखबार की ताकत इतनी थी कि ब्रिटिश हुकूमत उससे भयभीत हो गई।
जनसंचार विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. चंदन सिंह ने कहा कि हिक्की ने गवर्नर वारेन हेस्टिंग्स के कुशासन पर कटाक्ष भरे लेख लिखे, जिसके कारण उन्हें जेल और आर्थिक संकट झेलना पड़ा। फिर भी, मात्र दो वर्ष चले इस पत्र ने भारतीय पत्रकारिता की नींव रखी। उन्होंने आधुनिक डिजिटल युग में फेक न्यूज के संदर्भ में हिक्की की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। विभाग के टेक्निकल विशेषज्ञ आनंद सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
कार्यक्रम का संचालन छात्र सुमित सिंह ने किया जिन्होंने सभी वक्ताओं के विचारों को प्रभावी ढंग से श्रोताओं तक पहुंचाया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन छात्र दिव्याशु सिंह ने किया जिन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं, छात्रों एवं स्टाफ सदस्यों को धन्यवाद दिया। संगोष्ठी में विभाग के विद्यार्थियों ने भी भाग लिया।
संगोष्ठी में जनसंचार विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि जेम्स ऑगस्टस हिक्की द्वारा शुरू किया गया यह पत्र एशिया का पहला मुद्रित समाचार पत्र था। हिक्की बंगाल गजट ने न केवल खबरें दीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता का माध्यम भी बना। बाजार भाव, शादियां और राजनीतिक विश्लेषण से भरपूर यह पत्र सत्ता के विरुद्ध सत्य बोलने का प्रतीक था। यह बात दीगर है कि दो साल में अखबार बंद हो गया। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे वर्तमान पत्रकारिता के दौर में हिक्की के साहस से प्रेरणा लें।
जनसंचार विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर दिग्विजय सिंह राठौर ने कहा कि हिक्की गजट ने ईस्ट इंडिया कंपनी के भ्रष्टाचार के विरुद्ध साहसी पत्रकारिता की मिसाल कायम की। "हिक्की का नारा 'सभी के लिए खुला, लेकिन किसी से प्रभावित नहीं' आज भी प्रेस स्वतंत्रता का मूलमंत्र है।" दो पेज के अखबार की ताकत इतनी थी कि ब्रिटिश हुकूमत उससे भयभीत हो गई।
जनसंचार विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. चंदन सिंह ने कहा कि हिक्की ने गवर्नर वारेन हेस्टिंग्स के कुशासन पर कटाक्ष भरे लेख लिखे, जिसके कारण उन्हें जेल और आर्थिक संकट झेलना पड़ा। फिर भी, मात्र दो वर्ष चले इस पत्र ने भारतीय पत्रकारिता की नींव रखी। उन्होंने आधुनिक डिजिटल युग में फेक न्यूज के संदर्भ में हिक्की की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। विभाग के टेक्निकल विशेषज्ञ आनंद सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
कार्यक्रम का संचालन छात्र सुमित सिंह ने किया जिन्होंने सभी वक्ताओं के विचारों को प्रभावी ढंग से श्रोताओं तक पहुंचाया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन छात्र दिव्याशु सिंह ने किया जिन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं, छात्रों एवं स्टाफ सदस्यों को धन्यवाद दिया। संगोष्ठी में विभाग के विद्यार्थियों ने भी भाग लिया।
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