मॉडल टेनेंसी एक्ट 2020 केंद्रीय कैबिनेट में पारित - मकान मालिक और किराएदारों के लिए कानूनी सुरक्षात्मक कवच का रोडमैप साबित होगा | #NayaSaberaNetwork

मॉडल टेनेंसी एक्ट 2020 केंद्रीय कैबिनेट में पारित - मकान मालिक और किराएदारों के लिए कानूनी सुरक्षात्मक कवच का रोडमैप साबित होगा | #NayaSaberaNetwork


नया सबेरा नेटवर्क 
मॉडल टेनेंसी एक्ट 2020 मकान मालिक, किराएदारों के विवादों का खात्मा - रेंट मार्केट में पारदर्शिता, हर जिले में रेंट अथॉरिटी का प्रावधान - एड किशन भावनानी
गोंदिया - भारत में दशकों से हम प्रिंट मीडिया के माध्यम से मकान मालिकों और किरायेदारों के विवादों, अदालतों में केस इत्यादि के बारे में पढ़ते और सुनते आ रहे हैं जो आज भी है। रेंट कंट्रोल बोर्ड से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अनेकों मामले जारी है और दोनों पक्ष अदालतों की दहलीजों पर न्याय की गुहार लगाए हुए हैं।..दरअसल वर्तमान समय में किरायेदारों से जुड़े मामलों के लिए रेंट कंट्रोल एक्ट 1948 लागू है, इसके आधार पर राज्यों ने अपने-अपने कानून बनाए हैं। महाराष्ट्र में रेंट कंट्रोल एक्ट 1999 लागू है तो दिल्ली में रेट कंट्रोल एक्ट 1958, चेन्नई में तमिलनाडु बिल्डिंग 1960 इस प्रकार हर राज्य में अपना अपना कानून लागू है।..दरअसल जमीन स्वास्थ्य यह राज्यों का विषय होता है, इसलिए नियम उनके ही चलते हैं। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में मॉडल टेनेंसी एक्ट के प्रारूप को मंजूरी दे दी गई है। इसमें मकान मालिकों और किराएदारों के हितों को देखते हुए कई प्रावधान किए गए हैं। हालांकि इस मॉडल एक्ट को लागू करने या नहीं करने का फैसला राज्य सरकार पर छोड़ा गया है, ये मॉडल एक्ट किसी राज्य में उसी दिन से प्रभावी होगा जिस दिन से राज्य सरकार उसे विधानसभा से पारित करवाकर लागू करेगी और यह नया कानून मॉडल टेनेंसी एक्ट 2021 केंद्र की पूरे देश में एक कानून बनाने की एक कोशिश है। असल में इस कानून का ड्राफ्ट 2019 में ही बना था और इसके आधार पर राज्यों में अपने नियमों को आकार मिलेगा याने यह कानून एक फ्रेमवर्क के रूप में काम करेगा याने इस कानून के तहत अब न ही किरायेदार कब्ज़ा कर सकेंगे और न ही मकान मालिक मनमानी, मकान किराये पर देना और लेना, दोनों में ही खूब झंझट है लेकिन अब यह कानून किराये और इससे जुड़े मसलों पर फ्रेमवर्क की तरह काम करेगा। राज्य अपने रेंट कंट्रोल एक्ट में संशोधन कर या इसे जस का तस अपने यहां लागू कर सकते हैं और हमारे माननीय प्रधानमंत्री महोदय का स्वप्न भी है कि 2022 तक सबको एक घर होगा। इस कानून के द्वारा रेंटल मार्केट को संस्थागत बनाने की एक कोशिश की गई है ताकि खाली पड़े मकानों का बेहतर प्रयोग हो सके, क्योंकि आज अनेक मकान मालिक मकान को किराए पर देने से हिचकते हैं क्योंकि अनेक विवाद उत्पन्न होते हैं और कब्जा हो जाता है।....बात अगर हम विदेशों की करें तो इस संबंध में अमेरिका मैं रेंटल मार्केट में कई बड़ी-बड़ी कंपनियों का प्रभुत्व है और इस क्षेत्र मैं बड़ा इकोनामि कस्ट्रक्चर भी विकसित हुआ है जो भारत में भी होने की संभावना बढ़ेगी.. बात अगर हम मॉडल टेनेंसी एक्ट 2020 की करें तो यह 27 पृष्ठों 8 चैप्टरों दो शेड्यूल और 47 धाराओं में विभाजित किया गया है। इस की 10 प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं पहला - किराएदार और मकान मालिक में एग्रीमेंट होना अनिवार्य है और इसकी जानकारी रेंट अथॉरिटी को जरूर देनी होगी। दूसरा- सिक्योरिटी डिपॉजिट अधिक से अधिक मकान के किराए का 2 माह का होगा। तीसरा - शर्तें और नियम मकान मालिक मनमाने ढंग से नहीं रख सकेगा। चौथा- किराए में बढ़ोतरी के लिए मकान मालिक को 3 माह पहले नोटिस देना होगा। पांचवा- मरम्मत के संबंध में स्पष्ट होगा कि मकान मालिक और किराएदार कितना कितना करेंगे। छठवां- नए एग्रीमेंट के कायम होने पर पुराने विवादों का कोई असर नहीं होगा। सातवां- इस नए कानून के दायरे में गांव को भी शामिल किया गया है। आठवां- इस कानून में होटल, लॉजिंग, इंडस्ट्रियल, रेंटल प्रॉपर्टी शामिल नहीं होगी। नववां- यदि एग्रीमेंट समाप्त होने पर मकान खाली नहीं किया जाता तो 2 महीने तक दोगुना और उसके बाद 4 गुना किराया चुकाना होगा। दसवां- किराएदार को सबलेट और स्ट्रक्चर बदलने के लिए मकान मालिककी सहमति लेना अनिवार्य होगी। इस कानून के अनुसार रेंट दोनों पक्ष आपस में तय करेंगे और रेंट एग्रीमेंट जिला रेंट अथॉरिटी को जमा करना अनिवार्य है। विवाद होने पर रेंट अथॉरिटी के पास जाना होगा इसमें संतुष्ट ना हो तो रेंटकोर्ट जाना होगा, उसके बाद अंतिम फैसला रेंट ट्रिब्यूनल का होगा। हर स्तर पर विवाद का फैसला 60 दिन में सुनाना होगा। अगर मकान मालिक डिपॉजिट रिफंड नहीं कर पाया तो किराएदार को सामान्य ब्याज दर से ब्याज मिलेगा मकान मालिक बिजली पानी जैसी बुनियादी सेवाएं नहीं रोक सकता। यदि रोकना है तो 24 घंटे पहले सूचना देनी होगी। तथा एग्रीमेंट भी अवधि मैं किराएदार को निकाला नहीं जा सकता यदि आपसी सहमति से कुछ निर्णय लेना हो तो कर सकते हैं। अब मॉडल टेनेंसी एक्ट के आने के बाद खाली पड़े मकानों को किरायेदारों के लिए खोलने की कवायद होगी। सरकार को उम्मीद है कि आवास की कमी को दूर करने के लिए रेंटल आय को एक व्यापार मॉडल के रूप में भी देखा जा सकेगा, जिसके चलते निजी क्षेत्र की साझेदारी भी बढ़ेगी। सरकार ने किरायदारों और मकान मालिकों के लिए इसमें नए प्रावधान और नियम भी शामिल किए हैं। इस मॉडल एक्ट में एक शिकायत निवारण अथॉरिटी बनाए जाने का प्रावधान किया गया है। कई मामलों में देखा गया है कि किराएदार मकान छोड़ना नहीं चाहते जिससे मकान मालिक और उसके बीच तनाव की स्थिति आ जाती है, ऐसी स्थिति से निपटने के लिए शिकायत निवारण अथॉरिटी के गठन का प्रस्ताव किया गया है। अथॉरिटी के लिए किसी भी शिकायत का निपटारा 60 दिनों के अंदर करना अनिवार्य बनाया गया है...। इस मॉडल एक्ट में एक शिकायत निवारण अथॉरिटी बनाए जाने का प्रावधान किया गया है। कई मामलों में देखा गया है कि किराएदार मकान छोड़ना नहीं चाहते जिससे मकान मालिक और उसके बीच तनाव की स्थिति आ जाती है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए शिकायत निवारण अथॉरिटी के गठन का प्रस्ताव किया गया है. अथॉरिटी के लिए किसी भी शिकायत का निपटारा 60 दिनों के अंदर करना अनिवार्य बनाया गया है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, देश भर में लगभग 1.1 करोड़ मकान खाली थे। इन मकानों को किराये पर उपलब्‍ध कराने से वर्ष 2022 तक सभी के लिये घर के विज़न को पूरा किया जा सकेगा। वर्तमान किराया नियंत्रण कानून के कारण किराये पर दिये जाने वाले मकानों की संख्या में वृद्धि नही हो रही है। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन करें तो हम यही विश्लेषण निकालेंगे के इस मॉडल टेनेंसी एक्ट 2021 ये मकान मालिक और किराएदार दोनों के लिए कानूनी सुरक्षात्मक कवच का रोडमैप साबित होगा और मकान मालिक किराएदार के विवादों का खात्मा भी होगा रेंट मार्केट में पारदर्शिता और हर जिले में रेट अथॉरिटी कंट्रोल बोर्ड बनेगा। 
-संकलनकर्ता लेखक- कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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