वायरस से बचना आसान, डर से बचना मुश्किल:कमलेश तिवारी | #NayaSaberaNetwork

नया सबेरा नेटवर्क
प्रयागराज मनौवैज्ञानिक केंद्र के वैज्ञानिक ने दी सलाह
डर से ज्यादा खतरनाक कोई वॉयरस नहीं
जौनपुर। कोरोना के प्रकोप के चलते जहां आम-जन दहशत में हैं वहीं निजी व सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं नाम मात्र हैं। इलाज व जांच को लेकर निरंतर लोगों में दहशत बढ़ती जा रही है। ऐसे में इलाहाबाद मनोविज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा.कमलेश तिवारी ने तमाम लोगों के लिए समझने, सोचने व धैर्य रखने के मद्देनजर राष्ट्रीय सहारा से खास बात-चीत के दौरान विशेष जानकारी देते हुए कहा कि लोगों के मन में मरने का जो डर बैठ गया है उससे कैसे बचा जाए? क्योंकि वायरस से बचना तो बहुत ही आसान है, लेकिन जो डर आपके और दुनिया के अधिकतर लोगों के भीतर बैठ गया है, उससे बचना बहुत ही मुश्किल है। इस महामारी से कम लोग, इसके डर से लोग ज्यादा मरेंगे। डर से ज्यादा खतरनाक इस दुनिया में कोई भी वायरस नहीं है। इस डर को समझिये, अन्यथा मौत से पहले ही आप एक जिंदा लाश बन जाएँगे। यह जो भयावह माहौल आप अभी देख रहे हैं, इसका वायरस आदि से कोई लेना देना नहीं है। यह एक सामूहिक पागलपन है, जो एक अंतराल के बाद हमेशा घटता रहता है, कारण बदलते रहते हैं, कभी सरकारों की प्रतिस्पर्धा, कभी कच्चे तेल की कीमतें, कभी दो देशों की लड़ाई, तो कभी जैविक हथियारों की टेस्टिंग। इस तरह का सामूहिक पागलपन समय-समय पर प्रकट होता रहता है। नजदीकी रिश्ता खत्म है लोग एक दूसरे से मिलना नहीं चाहते ऐसे में डर से ज्यादा खतरनाक इस दुनिया में कोई भी वायरस नहीं है।  व्यक्तिगत पागलपन की तरह कौमगत, राज्यगत, देशगत और वै·िाक पागलपन भी होता है। इस में बहुत से लोग या तो हमेशा के लिए विक्षिप्त हो जाते हैं या फिर मर जाते हैं।ऐसा पहले भी हजारों बार हुआ है, और आगे भी होता रहेगा और आप देखेंगे कि आने वाले बरसों में युद्ध तोपों से नहीं बल्कि जैविक हथियारों से लड़ें जाएंगे। मैं फिर कहता हूं हर समस्या मूर्ख के लिए डर होती है, जबकि ज्ञानी के लिए अवसर। इस महामारी में आप घर बैठिए, पुस्तकें पढि़ए, शरीर को कष्ट दीजिए और व्यायाम कीजिये, फिल्में देखिये, योग कीजिये और एक माह में 5 किलो वजन घटाइए, चेहरे पर बच्चों जैसी ताजगी लाइये अपने शौक़ पूरे कीजिए।मुझे अगर 15 दिन घर  बैठने को कहा जाए तो में इन 15 दिनों में 30 पुस्तकें पढूंगा और नहीं तो एक किताब लिख डालिये, इस महामन्दी में पैसा इन्वेस्ट कीजिये, ये अवसर है जो बीस तीस साल में एक बार आता है पैसा बनाने की सोचिए। आप क्यूं बीमारी की बात करके वक्त बर्बाद करते हैं। भय और भीड़ का मनोविज्ञान सब के समझ नहीं आता है। डर में रस लेना बंद कीजिए।आमतौर पर हर आदमी डर में थोड़ा बहुत रस लेता है, अगर डरने में मजा नहीं आता तो लोग हॉरर फिल्म देखने क्यों जाते? आप महामारी से डरते हैं तो आप भी भीड़ का ही हिस्सा हैं। शास्त्रों का अध्ययन कीजिए, साधू-संगत कीजिए, और साधना कीजिए, विद्वानों से सीखें आहार का भी विशेष ध्यान रखिए, स्वच्छ जल पीजिए जब  तक मौत आ ही न जाए, तब तक उससे डरने की कोई ज़रूरत नहीं है। डर एक  प्रकार की मूढ़ता है, अगर किसी महामारी से अभी नहीं भी मरे तो भी एक न एक दिन मरना ही होगा, और वो एक दिन कोई भी दिन हो सकता है, इसलिए विद्वानों की तरह जीयें, दूरी बना कर रहिए।डॉ कमलेश तिवारी ने कहा कि समस्या होने पर आप तत्काल मेरे मोबाइल नंबर ं 9545255216 पर सुझाव प्राप्त कर सकते हैं।

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