भारत विभिन्न भाषाओं का देश है और हर भाषा का अपना महत्व है परन्तु जब देश की बात होती है तो देश में सर्वाधिक बोली जाने वाली हिंदी ही एकमात्र ऐसी भाषा है जिसमें पूरे देश को एक सूत्र में बांधने की क्षमता है और ’हिंदी दिवस' हिंदी के इसी उत्कर्ष और गौरव का उत्सव है।
भारत की सभी भाषाओं के बीच सेतु का काम करने वाली हिंदी को भारत के संविधान और भारतीय जनमानस में विशेष स्थान प्राप्त है। 'हिंदी दिवस' हिंदी के माध्यम से सभी भारतीय भाषाओं के सम्मान का दिवस भी है।
आज ही के दिन 14 सितंबर 1949 में हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाए जाने की मांग को दृष्टि में रखते हुए संविधान सभा ने हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में मान्यता दी थी। 1950 में संविधान के अनुच्छेद 343 (1) के द्वारा हिंदी को देवनागरी लिपि में राजभाषा का दर्जा दिया गया था। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया था कि आगे पंद्रह वर्षों तक हिंदी के साथ अंग्रेजी भी राजकाज की भाषा रहेगी और बाद में समीक्षा के बाद सिर्फ हिंदी को यह दर्जा दिया जाएगा। लेकिन आजादी के इन 80 वर्षों के दौरान देश के अंदर दूसरे मुद्दे प्रभावी रहे और यह समीक्षा नहीं की जा सकी।
देश के अंदर बोली जाने वाली विभिन्न भाषाएं इस देश की बहुरंगी संस्कृति का प्रतीक हैं और हर भाषा का अपना सौंदर्य है परन्तु जैसे हर देश का अपना राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान होता है उसी प्रकार देश की अपनी राष्ट्रभाषा भी अनिवार्य है। राष्ट्रभाषा देश की पहचान होती है। जिन देशों ने अपनी राष्ट्रभाषा को समृद्ध कर उसे सामान्य बोलचाल से लेकर शिक्षा, साहित्य और विज्ञान की भाषा बनाया वे आज दुनिया के विकसित देशों की श्रेणी में आगे खड़े हैं। अब समय आ गया है कि पूरे विश्व में भारत की पहचान भी उसकी राष्ट्रभाषा के साथ स्थापित की जाय।


