चन्दन अग्रहरि @ शाहगंज, जौनपुर। स्थानीय नगर के रामलीला मैदान में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के दूसरे दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा वाचक राजन जी महाराज ने भगवान श्रीराम के वनवास काल से जुड़े प्रसंगों का मार्मिक वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। वहीं शिव पार्वती विवाह की कथा सुन भक्त भाव—विभोर हो उठे। कथा स्थल पर दिनभर राम नाम की गूंज सुनाई देती रही।
कथा के दौरान महाराज ने तीर्थराज प्रयागराज में महर्षि भारद्वाज के आश्रम से जुड़ा प्रसंग सुनाया। साथ ही बताया कि वनवास के समय भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जब प्रयाग पहुंचे तो महर्षि भारद्वाज ने उनका आदरपूर्वक स्वागत किया। संतों का सान्निध्य और तीर्थों का महत्व जीवन को पवित्र व सार्थक बनाता है। इस संदेश को महाराज ने सरल शब्दों में समझाया।
राजन जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, मर्यादा और कर्तव्य पालन की सर्वोच्च मिसाल है। सत्य, सेवा और संस्कार के मार्ग पर चलकर ही मानव जीवन को सफल बनाया जा सकता है। भारद्वाज मुनि की सेवा-भावना से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि संतों के बताए मार्ग पर चलना ही सच्ची भक्ति है।
कथा के प्रारंभ में मुख्य जजमानों के साथ द्वितीय दिवस के जजमानों के नाम श्रद्धालुओं के समक्ष रखे गए। श्रीश अग्रहरि, आनन्द अग्रहरि, सुनील अग्रहरि टप्पू, अजितेश अग्रहरि, भुवनेश्वर मोदनवाल, श्रीष मोदनवाल, शीम प्रकाश, विवेक सोनी, अश्वनी अग्रहरि, राम अवतार अग्रहरि, कृष्ण कांत सोनी समेत श्रद्धालु जजमान के रुप में शामिल रहे।
भजनों की मधुर प्रस्तुति के बीच पूरा पंडाल राम नाम के उद्घोष से गूंज उठा। अंत में आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया। आयोजन समिति द्वारा व्यवस्थाएं संभाली गईं जबकि सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल तैनात रहा। नौ दिवसीय श्रीराम कथा प्रतिदिन दोपहर तीन बजे से सायंकाल 7 बजे तक आयोजित की जा रही है जिसमें नगर सहित आस—पास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
कथा के दौरान महाराज ने तीर्थराज प्रयागराज में महर्षि भारद्वाज के आश्रम से जुड़ा प्रसंग सुनाया। साथ ही बताया कि वनवास के समय भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जब प्रयाग पहुंचे तो महर्षि भारद्वाज ने उनका आदरपूर्वक स्वागत किया। संतों का सान्निध्य और तीर्थों का महत्व जीवन को पवित्र व सार्थक बनाता है। इस संदेश को महाराज ने सरल शब्दों में समझाया।
राजन जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, मर्यादा और कर्तव्य पालन की सर्वोच्च मिसाल है। सत्य, सेवा और संस्कार के मार्ग पर चलकर ही मानव जीवन को सफल बनाया जा सकता है। भारद्वाज मुनि की सेवा-भावना से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि संतों के बताए मार्ग पर चलना ही सच्ची भक्ति है।
कथा के प्रारंभ में मुख्य जजमानों के साथ द्वितीय दिवस के जजमानों के नाम श्रद्धालुओं के समक्ष रखे गए। श्रीश अग्रहरि, आनन्द अग्रहरि, सुनील अग्रहरि टप्पू, अजितेश अग्रहरि, भुवनेश्वर मोदनवाल, श्रीष मोदनवाल, शीम प्रकाश, विवेक सोनी, अश्वनी अग्रहरि, राम अवतार अग्रहरि, कृष्ण कांत सोनी समेत श्रद्धालु जजमान के रुप में शामिल रहे।
भजनों की मधुर प्रस्तुति के बीच पूरा पंडाल राम नाम के उद्घोष से गूंज उठा। अंत में आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया। आयोजन समिति द्वारा व्यवस्थाएं संभाली गईं जबकि सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल तैनात रहा। नौ दिवसीय श्रीराम कथा प्रतिदिन दोपहर तीन बजे से सायंकाल 7 बजे तक आयोजित की जा रही है जिसमें नगर सहित आस—पास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
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