राकेश शर्मा @ खेतासराय, जौनपुर। स्थानीय क्षेत्र बरजी गांव में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए डिस्पेंसरी संचालक सुनील राजभर (30) का अंतिम संस्कार घटना के दो दिन बाद पुलिस साये में रविवार को छुनछा घाट पर किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और प्रशासनिक आश्वासन के बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए। हालांकि, घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस अब तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है, जिससे क्षेत्र में असंतोष और अविश्वास की स्थिति बनी हुई है। गौरतलब है कि सुनील का शव गेट के पिलर से लटकता मिला था जिसे परिजन शुरू से ही हत्या कर आत्महत्या का रूप देने की साजिश बता रहे हैं। अंतिम संस्कार के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। गांव में तनाव को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। मृतक की मां सुनीता देवी और अन्य परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच होती तो अब तक सच्चाई सामने आ चुकी होती। उनका आरोप है कि पुलिस केवल औपचारिक कार्रवाई कर रही है और वास्तविक दोषियों तक पहुंचने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। परिजनों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी कई बिंदु स्पष्ट नहीं किए गए हैं जिससे संदेह और गहराता जा रहा है। अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। लोगों का कहना है कि सुनील गांव के लिए केवल एक डिस्पेंसरी संचालक नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के लिए भरोसे का नाम थे। उनकी मौत को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही हत्याकांड का खुलासा नहीं हुआ और दोषियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। पुलिस का दावा है कि मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर जांच की जा रही है। नामजद आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बावजूद अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस अंधेरे में तीर चला रही है और जांच की दिशा स्पष्ट नहीं है। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने की बात कही जा रही है लेकिन मौत का स्पष्ट कारण अभी भी सार्वजनिक नहीं किया गया है। यही वजह है कि संदेह की सुई हत्या की ओर ही घूम रही है। क्षेत्रवासियों की मांग है कि मामले की जांच किसी उच्चाधिकारी या स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। फिलहाल, सुनील का अंतिम संस्कार तो हो गया, लेकिन सवाल आज भी जस के तस हैं। न्याय की आस में परिजन और ग्रामीण पुलिस की अगली कार्रवाई की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं।
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