बेलाल जानी @ जौनपुर। शहर के मोहल्ला उर्दू बाज़ार स्थित दलेल ख़ां इमाम बारगाह में हैदरी कमेटी के तत्वावधान में काबे में हुई अली मौला की विलादत के सिलसिले में जश्ने मौला अली का आयोजन हुआ। महफिल में शायरों ने अपने कलामों को पेश करके ऐसा खूबसूरत समा बांधा कि वाहवाही के साथ नारे हैदरी या अली के नारे से महफिल गूंज उठी।
महफिल का आगाज़ मौलाना सैयद दिलशाद हुसैन द्वारा पढ़े गये हदीसे क़िस्सा से हुआ। मौलाना सैयद हसन अब्बास हायरी ने महफ़िल में मौला अली की काबे में हुई पैदाइश के सिलसिले में तक़रीर की। मौला अली की शान में कसीदा पढ़ने के सिलसिले की शुरुआत करते हुए अली एहरान ने पढ़ा मेरा मौला मेरा आका़ हैदरे कर्रार है, मुन्तजि़र आज जिसकी काबे की दीवार है, रहमते अल्लाह की बरसेंगी इसका है यकीं, जश्ने मौला के लिए मेरा सजा घर बार है, फैसला करते हैं ऐसा बस मेरे मौला अली, मानता वह भी है जो इस्लाम का गद्दार है, वक्त के इमाम को जिसने न पहचाना, अली वह तो बस जाहीलियत की मौत का हक़दार है।शोहरत जौनपुरी ने पढ़ा— ज़मीनों आसमां मंजर बा मंजर मुस्कुराते हैं, अली नाजि़ल हुए मेहराबों मेंबर मुस्कुराते हैं, हयाते दायमी काबे में पाई हुब्बे ख़ालिक़ से, मिला है कुवते बाज़ू पैयंबर मुस्कुराते हैं। एहतेशाम जौनपुरी ने पढ़ा— कह दो मरहब से ये सोच समझकर आए, खून पीने को है तैयार अली की तलवार। निजा़मत के फरायज को अंजाम दे रहे मौलाना निसार हुसैन प्रिंस ने पढ़ा—— तलवार तो बहुत से गले पर चली मगर, ऐसे भी कुछ गले थे जो तलवार पर चले जिसको सुनकर वाह वाही के साथ नारे हैदरी और या अली की सदा से पूरा वातावरण गूंजने के साथ ही खुशनुमा हो गया। इसके अलावा शायरों में आरिफ जौनपुरी, मुनाजिर सिवानी, शाहिद बनारसी, रशीद मिर्जापुर, साकिब चंदौलवी, शाहबाज खान रन्नवी, हेजान इनामपुरी, हसन फतेहपुरी, फैहमी इनामपुरी फरहान अली रन्नवी आदि ने एक से बढ़कर एक अपने कलामों को पेश किया।
इस अवसर पर हैदरी कमेटी के कन्वीनर रिजवान हैदर, दिलशाद हुसैन, सरदार हुसैन, इरशाद जैदी तहसील अब्बास सोनी, जैन रिज़वी, रजा हैदर रूमी, शमशीर हसन, मुमताज हैदर, लाडले हसन, खलील हसन, एजाज़ हुसैन खां, इम्तेयाज हुसैन खां, नवाब हसन नाएब जैदी, समीर खान, शबीहुल हसन, गौहर रिज़वी,शीबू, रियान अब्बास, मोहम्मद बिलाल जानी पत्रकार के अलावा तमाम लोग मौजूद रहे।
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