विनोद कुमार, केराकत, जौनपुर। स्थानीय क्षेत्र के बेहड़ा हरसियावीर के बनवासी बस्ती में बाल विवाह से मुक्ति को लेकर बैठक की गई। यह बैठक बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत बंधुता मंच के सहयोग से किया गया।
इस मौके पर सौहार्द फेलो नीरा आर्या ने बताया कि बाल विवाह जैसी कुरीतियों को जड़ से समाप्त करने और जौनपुर को बाल विवाह मुक्त जिला बनाने के उद्देश्य से अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत लोगों को बाल अधिकारों और उनकी सुरक्षा से जुड़े विषयों बाल विवाह, बाल श्रम, बाल यौन शोषण और बाल तस्करी के खतरों और दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी जा रही है। बाल विवाह बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और भविष्य पर गंभीर असर डालता है और खासकर बच्चियों के सपनों को अधूरा कर देता है।
वहीं अनीता जी ने कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक बुराई और गैरकानूनी कृत्य है। भारत में लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष और लड़कों की 21 वर्ष तय की गई है। इससे कम उम्र में की गई शादी को बाल विवाह माना जाता है। इस दौरान गांव की महिलाओं और किशोरियों ने बाल विवाह रोकने की पहल का स्वागत करते हुए सहयोग का संकल्प लिया। बैठक की समाप्ति के दौरान वाल विवाह का विरोध करने वाली बन्दनी को संविधान की पुस्तक और साल देकर सम्मानित किया गया।
इस मौके पर सौहार्द फेलो नीरा आर्या ने बताया कि बाल विवाह जैसी कुरीतियों को जड़ से समाप्त करने और जौनपुर को बाल विवाह मुक्त जिला बनाने के उद्देश्य से अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत लोगों को बाल अधिकारों और उनकी सुरक्षा से जुड़े विषयों बाल विवाह, बाल श्रम, बाल यौन शोषण और बाल तस्करी के खतरों और दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी जा रही है। बाल विवाह बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और भविष्य पर गंभीर असर डालता है और खासकर बच्चियों के सपनों को अधूरा कर देता है।
वहीं अनीता जी ने कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक बुराई और गैरकानूनी कृत्य है। भारत में लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष और लड़कों की 21 वर्ष तय की गई है। इससे कम उम्र में की गई शादी को बाल विवाह माना जाता है। इस दौरान गांव की महिलाओं और किशोरियों ने बाल विवाह रोकने की पहल का स्वागत करते हुए सहयोग का संकल्प लिया। बैठक की समाप्ति के दौरान वाल विवाह का विरोध करने वाली बन्दनी को संविधान की पुस्तक और साल देकर सम्मानित किया गया।
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