जौनपुर। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में तापमान गिरावट एवं आर्द्रता वृद्धि के कारण रबी फसलों में लगने वाले सामयिक कीट/रोग लगने की सम्भावना बढ़ गयी है जिसको दृष्टिगत रखते हुए बचाव एवं प्रबंधन हेतु फसलवार सुझाव एवं संस्तुतियां निम्नलिखित हैं। गेहूं की बुवाई हेतु रोग रहित बीज तथा रोग अवरोधी प्रजाति का चुनाव करना चाहिए। भूमि जनित रोगों से बचाव हेतु ट्राइकोडर्मा 2.5 किग्रा० प्रति हे० की दर से 60-75 किग्रा० गोबर की खाद में मिलाकर हल्के पानी का छिटा देकर 8-10 दिन छाया में रखने के पश्चात् बुवाई से पूर्व आखिरी जुताई के समय खेत में मिलाकर भूमिशोधन करना चाहिए।
दीमक/गुजिया खड़ी फसल में दीमक/गुजिया के नियंत्रण हेतु क्लोरपायारीफास 20 प्रतिशत ई० सी० 2.5 ली/हे0 की दर से सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करना चाहिए। माहू के किट के जैविक नियंत्रण हेतु एजाडिरेक्टिन 0.15 ई0 सी0 2.5 ली/हे० की दर से 500-600 ली0 पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। पत्ती धब्बा रोग के नियंत्रण हेतु थायोफीनेट मिथाइल 70 प्रतिशत डब्लू पी 700 ग्राम अथवा मेन्कोजेब 70 प्रतिशत डब्लू पी 2.0 किग्रा प्रति हे० की दर से 600 से 700 ली० पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।पीली गेरुई के नियंत्रण हेतु प्रोपिकोनाजोल 25 प्रतिशत ई०सी० 500 मिली/हे० की दर से लगभग 600-700 ली० पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिये। सरसो/राई में आरामक्खी/बालदार सूड़ीः- आरामक्खी एक सूड़ी प्रति पौधा एवं सूड़ी 10 से 15 प्रतिशत प्रकोपित पत्तियां दिखाई देने पर आर्थिक क्षति स्तर हुए मैलाथियान 50 प्रतिशत ई०सी० की 1.5ली० अथवा क्यूनालफास 25 प्रतिशत ई०सी० की 1.25 ली० मात्रा को 500-600 ली० पानी में घोलकर प्रति हे० की दर से छिडकाव करें।
पत्ती सुरंगक कीट में डाईमिथोएट 30 प्रतिशत ई०सी० की 650 मिली० मात्रा प्रति हे० की दर से छिडकाव करें अथवा कार्बोफ्यूरान 3 प्रतिशत सी०जी० 66 किग्रा०/हे० की दर से छिडकाव करे। बीज जनित रोगों से सुरक्षा हेतु 2.5 ग्राम थिरम 75 प्रतिशत प्रति किग्रा० की दर से उपचारित करके बोयें। दलहन चना/मटर/मसूर बीज जनित रोगों से सुरक्षा हेतु ट्राइकोडर्मा (4 ग्राम/किग्रा बीज) से उपचारित करके बीज बोयें। कटुआ कीट/कट वर्म मेटारेजियम एनीसोप्ली 2.5 किग्रा० प्रति हे० की दर से 400-500 ली० पानी में घोलकर सायं काल छिड़काव करना चाहिए। रासायनिक नियंत्रण हेतु क्लोर पायरीफास 20 प्रतिशत ई०सी० की 2.5 ली० मात्रा को 500-600 ली० पानी में घोलकर प्रति हे० की दर से छिडकाव करें।
मटर की तना मक्खी कीट नियंत्रण हेतु लेम्बडा साईहेलोथ्रिन 04.90 प्रतिशत सी०एस० की 300 मिली मात्रा को 500-600 ली० पानी में घोलकर प्रति हे० की दर से छिडकाव करें। आलू में लगने वाले ब्लैक स्कर्फ से बचाव हेतु स्वस्थ्य एवं रोग रोधी प्रजातियों तथा प्रमाणित बीज का चुनाव करना चाहिए। ब्लैक स्कर्फ रोग से बचाव हेतु पेनफ्लुफेन 22.43 प्रतिशत एफएस 83 मिली प्रति 100 ली० पानी के घोल में 800 किग्रा० बीज की दर से बीजशोधन कर बुवाई करनी चाहिए।
कृषि विभाग की कृषि रक्षा अनुभाग द्वारा फसलों में लगने वाले कीट/रोग सम्बन्धी समस्याओ के त्वरित निदान के लिए वाट्स एप नम्बर क्रमशः 9452247111, 9452257111 उपलब्ध कराये गये हैं। कृषक अपनी फसल सम्बन्धी समस्याओं व्हाट्सप/एसएमएस माध्यम से भेज सकते हैं। इसके अंतर्गत प्राप्त समस्याओं का समाधान निर्धारित समय सीमा 48 घंटे में किया जाता है।
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