जलज के पास पैनी और तीक्ष्ण दृष्टि थी - एस. हुसैन | #NayaSaberaNetwork



नया सबेरा नेटवर्क
- जलज के जन्मतिथि पर फरवरी में एक डॉक्यूमेंट्री और कॉफी टेबल बुक की चल रही है तैयारी। 
लखनऊ, 23 अक्टूबर 2021, स्वर्गीय जलज यादव एक युवा छाया चित्रकार थे, जो असमय में ही अपने घर परिवार और चाहने वालों को अलविदा कह गये। उनसे हम सबको बहुत आशायें थीं और जो पूरी भी अवश्य होतीं, अगर ज़िन्दगी ने उन्हें कुछ और मोहलत दी होती। जलज को एक ऐसी पैनी और तीक्ष्ण दृष्टि मिली थी, जो दृश्य के गर्भ में छिपे निहितार्थ को देख पाने और अभिव्यक्त करने में सक्षम थी। यद्यपि मेरा उनसे कोई साक्षात्कार नहीं था, लेकिन उनकी एक कलाकृति, जो उन्होंने महात्मा गॉंधी, बापू, की एक सौ एक्यावनवीं जयंती पर, उनके द्वारा निर्मित और प्रदर्शित की गयी थी, को देख कर ही मुझे उनकी दृष्टि बोध का आभास हो गया था। मैंने उस पर एक टिप्पणी भी की थी और उनके इस क्षेत्र में उन्नति की कामना भी की थी। पर जब उनके असमय में ही दिवंगत होने का समाचार मिला तो ऐसा लगा जैसे मेरा कोई अपना प्रिय मुझसे बिछड़ गया हो।


आज उनके परिवार और मित्रगण उनकी प्रथम पुन्यतिथि पर उन्हें याद कर अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं, इस अवसर पर मैं भी उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कामना करता हूँ कि ईश्वर उनकी आत्मा को चिर् शांति प्रदान करे। उक्त विचार उत्तर प्रदेश लखनऊ से कला समीक्षक शहंशाह हुसैन ने कार्यक्रम के दौरान व्यक्त की।
  कार्यक्रम के संयोजक भूपेंद्र कुमार अस्थाना ने बताया कि पिछले एक साल पहले 23 अक्टूबर 2020 को फोटोग्राफर जलज यादव (8 फरवरी 1990-23 अक्टूबर 2020) पुत्र श्री रमेश चन्द्र यादव  की आकस्मिक निधन हो गया था। वे 30 वर्ष के थे और मूल रूप से इलाहाबाद के रहने वाले थे। जलज के प्रथम पुण्यतिथि पर रूपकृति ओपेन आर्ट स्पेस के तत्वावधान में ऑनलाइन श्रद्धांजलि कार्यक्रम शनिवार को आयोजित की गई। जिसमें उत्तर प्रदेश, असम, नई दिल्ली, बिहार, गुजरात ,राजस्थान ,महाराष्ट्र आदि स्थानों से लोग शामिल हुए और अपने अपने शब्दों में अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का संचालन करते हुए भूपेंद्र कुमार अस्थाना ने जलज के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला साथ ही चित्रकार धीरज यादव ने जलज के छाया चित्रों की एक प्रेजेंटेशन भी दिखाई जिसमे जलज के सभी प्रमुख दुर्गा सीरीज़ की चित्रों को शामिल किया गया था।  जलज के अंतिम चित्र "गांधी" जो 26 से 30 सितंबर 2020को एक वर्चुअल शिविर के दौरान बनाया था उसे भी लोगों ने देखा और जलज के दूरदर्शी सोच और उनके शानदार चित्रों की सराहना की। 
धीरज यादव ने उनके बचपन और उनकी फोटोग्राफी से जुड़ी तमाम बातों को शेयर किया कहाँ कि जलज ने दुर्गा सीरीज पर बहुत काम किया है। दुर्गा की मूर्ति बनाते हुए उन स्थानों पर जा कर अपने विचारों के साथ फोटोग्राफी की है। जो बहुत ही अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करतीं हैं। जो आज तमाम गैलरियों और प्रदर्शनियों में चयनित हो रही हैं। नई दिल्ली के धूमिमल आर्ट गैलरी के 30वीं रवि जैन स्मारक फाउंडेशन के वार्षिक प्रदर्शनी मे भी दो छाया चित्रों को चयनित किया गया जिसकी प्रदर्शनी भी चल रही है। 
कार्यक्रम में कई वरिष्ठ जनों के संदेश भी प्राप्त हुए जिसमें लखनऊ से जस्टिस राकेश शर्मा ने भी अपने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सन्देश भेजा कि जलज यादव उदयीमान तरुण कलाकार को मेरी भावपूर्ण श्रद्धांजलि। उनकी कमी कलाकार बंधुओं की नई पीढ़ी महसूस करती रहेगी। वे सदा प्रेरणा स्वरूप रहेंगे। इसी प्रकार इलाहाबाद संग्रहालय के निदेशक श्री सुनील गुप्ता, वरिष्ठ फोटोग्राफर अनिल रिसाल, वंदना सहगल, गुजरात से भारवि त्रिवेदी, महाराष्ट्र से अमित ढाने, विक्रांत भिषे , राहुल देव, सुहानी जैन,जैसे तमाम कलाकारों ने अपनी श्रद्धांजलि स्वरूप सन्देश भेजे। कार्यक्रम के दौरान असम से बिनॉय पॉल, इलाहाबाद से कावेरी बिज, अनुराग अस्थाना आदि लोगों ने भी अपने अपने भाव प्रकट किए और वरिष्ठ कला समीक्षक अखिलेश निगम, कृष्ण कुमार यादव ,अभिनेता नरेंद्र पंजवानी, शैलेश ओझा नई दिल्ली , राम डोंगरे मध्यप्रदेश, वरिष्ठ अभिनेता अनिल रस्तोगी समेत बड़ी संख्या में लोगों ने अपने श्रद्धाजंलि सन्देश साझा किया। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।।
  भूपेंद्र अस्थाना  के बताया कि जलज कहते थे कि " फोटोग्राफी में मुझे नए आयामों की खोज करना अच्छा लगता है।  मेरी फोटोग्राफी सबसे पहले सड़क से शुरू हुई जहाँ विषय व्यापक और खुले रूप में मिल जाते हैं। मुझे लगता है मेरे लिए फोटोग्राफी में मेरे स्वयं का विस्तार है। कला वह नहीं जो आप देखते हैं। मैं चीजों को करीब से देखता हूँ और उसे महसूस करता हूँ और अपने फोटोग्राफी का हिस्सा बनाता हूँ। मैं यही चाहता हूँ कि मैं अपने फोटोग्राफ में जो महसूस करता हूँ  दर्शक भी उसे महसूस करे " । जलज यादव के चित्र सामान्य होते हुए भी एक अलग दृष्टिकोण की झलक मिलती है। जिसे दर्शकों को एक बार फिर से सोचने को मजबूर करती है।चित्र दर्शकों से संवाद करती है।
- भूपेंद्र कुमार अस्थाना 
9452128267

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