भारत की भारतमाला और सागरमाला परियोजनाएं बुनियादी परिवहन ढांचे का आधुनिकीकरण परिवहन कनेक्टिविटी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगी | #NayaSaberaNetwork

भारत की भारतमाला और सागरमाला परियोजनाएं बुनियादी परिवहन ढांचे का आधुनिकीकरण परिवहन कनेक्टिविटी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगी | #NayaSaberaNetwork


नया सबेरा नेटवर्क
भारतमाला और सागरमाला परियोजनाओं से परिवहन लागत में भारी कमी होगी और परिवहन कनेक्टिविटी से भारत राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रों में शुमार होगा - एड किशन भावनानी
गोंदिया - विश्व में किसी भी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को विशाल और मजबूत करने के लिए अनेक अंग होते हैं। जिसमें परिवहन व्यवस्था का बुनियादी ढांचा एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। क्योंकि वस्तुओं और सेवाओं की कीमत के निर्धारण में परिवहन लागत का महत्वपूर्ण स्थान होता है क्योंकि किसी भी वस्तुओं, सेवाओं का उनकी लागत और क्वालिटी के आधार पर बाजारों में मूल्यांकन होता है। अगर दोनों अच्छी रही तो उसका अंतरराष्ट्रीय स्तरपर वर्चस्व बढ़ता है जिससे उस देश की अर्थव्यवस्था विशाल और मजबूत होती है...। साथियों बात अगर हम विस्तारवादी सोच वाले देश या अन्य विकसित देशों की करें तो हमारे देशमें अनेकवस्तुएं, खिलौनों सेवाएं वहां से आती है और बहुत सी वस्तुओं और सेवाओं में हम अधिकतम प्रतिशत इन मुल्कों पर निर्भर हैं। अब जबसे हमारे पीएम से आत्मनिर्भर भारत बनने का मंत्र मिला है तबसे और कुछ योजनाएं उसके पूर्व भी तीव्रता से हर क्षेत्र में याने स्वास्थ्य से लेकर वाणिज्य, परिवहन हर क्षेत्र में हम बहुत जोरदार तरीके से भिड़ गए हैं और इन क्षेत्रों का बुनियादी ढांचा मजबूत करने की भरपूर भरपूर कवायद कर रहे हैं ताकि इसका लाभ हमारी कई पीढ़ियों तक जीवित रहे।...साथियों बात अगर हम परिवहन क्षेत्र की करे तो हमें दो सबसे बड़े महत्वपूर्ण परियोजनाएं मिली हैं। जिनका काम चालू है वह हैं, भारत माला, और सागरमाला, यह दोनों परियोजनाएं परिवहन के ढांचे के आधुनिकीकरण तथा परिवहन कनेक्टिविटी करने, अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के दूरगामी परिणाम मिलेंगे जो हमारे लिए मील का पत्थर साबित होंगे!!...साथियों बात अगर हम भारतमाला परियोजना की करें तो,भारतमाला परियोजना एक राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना हैं। इसके तहत नए राजमार्ग के अलावा उन परियोजनाओं को भी पूरा किया जाएगा तो अब तक अधूरे हैं। इसमें सीमा और अंतर्राष्‍ट्रीय संयोजकता वाले विकास परियोजना को शामिल किया गया है। बंदरगाहों और सड़क, राष्ट्रीय गलियारोंको ज्यादा बेहतर बनाना और राष्ट्रीय गलियारों को विकसित करना भी इस परियोजना में शामिल है। इसके अलावा पिछडे इलाकों, धार्मिक और पर्यटक स्थल को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग बनाए जाएंगे। चार धाम केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री के बीच संयोजकता बेहतर की जाएगी। जो इन सभी राज्‍यों को आपस में जोड़ेगा। परियोजना गुजरात और राजस्थान से शुरू होकर पंजाब व आगे पूरे हिमालयी राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड व तराई इलाकों के साथ उत्तर प्रदेश तथा बिहार की सीमाओं को कवर करेगी। पश्चिम बंगाल, सिक्किम,असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और मिजोरम में भारत-म्यांमार की सीमा तक सड़कों का जाल इस परियोजना के तहत विकसित किया जा रहा है। भारत माला के तहत राजमार्ग की कुल लंबाई करीब 51 हज़ार किमी की होगी। भारतमाला परियोजना के तहत पिछड़े इलाकों, धार्मिक और पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्गबनाए जा रहे हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने ट्वीट करते हुए स्‍वयं इस बात की जानकारी दी। पूर्व पीएम वाजपेयी की महात्‍वाकांक्षी सड़क परियोजना के पूरा होने से सामान और लोगों की आवाजाही आसान हो जाएगी। देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगी और लोगों को रोजगार मिलेगा।किसानों की फसल समय पर बाजारों तक पहुंच पाएगी। भारतमाला परियोजना के लिए सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय की ओर से तैयार किए गए एक मसौदे को पीएम की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने 24 अक्टूबर 2017 को मंजूरी दे दी थी। इस परियोजना के पहले चरण को साल 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इन राजमार्गों से निम्नलिखित फायदे होंगे। 1)पूरे देश में सड़क संपर्क में सुधार होगा। 2)आर्थिक गलियारों से कार्गो की त्वरित आवाजाही में होगी वृद्धि। 3)अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में वृद्धि सुनिश्चित होगी। 4)निवेश में तेजी एवं रोजगार सृजन में वृद्धि होने की संभावना 2022 में तक चलेगी परियोजनाइस कार्यक्रम की अवधि वर्ष 2017-18 से वर्ष 2021-22 तक है। चरण-1 में कुल 34,800 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जाना है। एक कार्यक्रम में केंद्रीय परिवहन मंत्री ने कहा कि पीएम के नेतृत्व में राष्ट्रीय राजमार्गों का जोर-शोर से निर्माण हो रहा है। कभी दो किमी रोजाना की रफ्तार से राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण हो रहा था और अब हम 38 किमी रोजाना पर पहुंच चुके हैं। हमें पूरा विश्वास है कि अगले तीन वर्षों में देश को अमेरिकी स्टैंडर्ड की सड़कें मिलेंगी।...साथियों बात अगर हम, सागरमाला, परियोजना की करें तो, सागरमाला प्रोजेक्ट भारत के सम्पूर्ण तटीय क्षेत्र से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परियोजना है। यह परियोजना हिन्द महासागर में भारत की स्थिति को मजबूत बनाती है। अगर भारत को एशिया में अपनी स्थिति को मजबूत रखना है तो हिन्द महासागर और अरब सागर के क्षेत्र में अपनी स्थिति को मजबूत रखना होगा। यह भारत के लिए आर्थिक और समुद्री सैन्य सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। तथाकथित विस्तार वादी देश की इस क्षेत्र में बढ़ती उपस्थिति भारत के लिए चिंता का कारण भी है। भारत में आयात निर्यात के कंटेनर सात सव से एक हज़ार किलोमीटर का सफर तय करते हैं, तब जाकर वह प्रोडक्शन हाउस से पोर्ट तक पहुंच पाते हैं। जबकि हमारे पड़ोसी विस्तार वादी देश में यह दूरी डेढ़ सौ से तीन सव किलोमीटर की है। भारत में कंटेनरों को पहुंचाने में सात से सत्रह दिनों का समय लग जाता है जबकि चीन में अधिकतम समय छह दिन ही लगते हैं। भारत में एक बेहतर कनेक्टिविटी के न होने से पारगमन समय बढ़ जाता है। इसकी वजह से लॉजिस्टिक कॉस्ट बढ़ जाती है। इसका उपाय मैरिटाइम लॉजिस्टिक सेक्टर के द्वारा किया जा सकता है। जिसके तहत बंदरगाहों और जहाजों को अर्थव्यवस्था में श्रेय देना होगा इसके साथ ही क्षेत्रीय विकास में भी सहयोग को जोड़ना होगा। इसका उद्देश्य बंदरगाहों के सम्पूर्ण विकास से सम्बंधित है साथ ही साथ, रसद गहन उद्योग को विकसित करना है। जिसमें परिवहन रसद लागत का बड़ा भाग शामिल है। रसद को समय में पूरा करने के लिए शहरों की बंदरगाहों से निकटता होना आवश्यक है। जिसकी वजह से लागत में कटौती होना संभव है। जो कि प्रतियोगितामें भागीदारी को सुनिश्चित करेगी।रसद गहन उद्योग, कुशल बंदरगाह, निर्बाध कनेक्टिविटी, रूकावट रहित यातायात व्यवस्था अपेक्षित कौशल आधार।बंदरगाह कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने और देश में बंदरगाह के नेतृत्व वाले विकास को बढ़ावा देने के लिए, भारत सरकार महत्वाकांक्षी सागरमाला परियोजना का नेतृत्व कर रही है। इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का उद्देश्य अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ-साथ देश के बंदरगाह बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण करना है। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करेंगे तो हम पाएंगे कि भारत की भारतमाला और सागरमाला परियोजनाएं बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण परिवहन कनेक्टिविटी, अर्थव्यवस्था को बढ़ावा बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगी।
संकलनकर्ता कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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