15 मार्च तक जारी अंतरिम आदेश 31 मई तक रहेगा विस्तारितः जिला जज | #NayaSaberaNetwork

Team NSN
नया सबेरा नेटवर्क
जौनपुर। जनपद न्यायाधीश एमपी सिंह ने संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत प्रदत असाधारण शक्ति एवं अनुच्छेद 227 के अंतर्गत अधीक्षण की असीमित शक्ति तथा दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 482 के अधीन दांडिक मामलों में प्रदत्त असीमित शक्ति एवं सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 की धारा 151 के अधीन सविल मामलों के अधीक्षण प्रदत्त असिमित शक्ति की प्रयुक्ति के साथ उच्च न्यायालय द्वारा निर्गत आदेश बीते 24 अप्रैल के अनुसरण में इस न्यायिक अधिष्ठान के सिविल एवं दांडिक न्यायालय में विचाराधीन वादों के संदर्भ में आदेश पारित किया है कि जनपद न्यायालय द्वारा पारित समस्त अंतरिम आदेश जो 15 मार्च 2021 को अस्तित्व में थे, को आगामी 31 मई तक विस्तारित किया है। उच्च न्यायालय अथवा इसके अधीनस्थ किसी अन्य न्यायालय का अंतरिम आदेश निर्देश जिसका तात्पर्य अग्रेतर आदेश तक प्रभावी/क्रियाशील होना है, तब तक उसका यथावत प्रवर्तन निरंतर रहेगा जब तक संबंधित न्यायालय के विशिष्ट आदेश से उसका परिमार्जन नहीं किया जाता है। दाण्डिक न्यायालयों द्वारा स्वीकृत जमानत आदेश अथवा सीमित अवधि हेतु अग्रिम जमानत आदेश जिनकी समय सीमा 31 मई अथवा उसके पूर्व समाप्तप्राय है, को 31 मई तक विस्तारित किया है। उच्च न्यायालय जनपद न्यायालय अथवा व्यवहार न्यायालय द्वारा ध्वस्तीकरण, बेदखली अथवा किसी भवन या भूखंड के अध्यासन से किसी व्यक्ति को वंचित किए जाने से संबंधित पूर्व से परित किसी आदेश जिसका निस्पादन मा न्यायालय द्वारा पारित आदेश की तिथि तक शेष है, का क्रियान्वयन 31 मई तक की अवधि के लिए स्थगित रखा जाएगा। उच्च न्यायालय के आदेश के पालन में उत्तर प्रदेश शासन, नगर पालिका अधिकारी, राज्य सरकार के अन्य स्थानीय निकायों द्वारा अभिकरण एवं निमित्त गठित किसी निकाय द्वारा किसी भवन अथवा भूखंड से किसी व्यक्ति को अध्यासन से वंचित किए जाने का कार्य एवं किसी निर्माण के ध्वस्तीकरण का कार्य 21 मई तक मंथर/धीमा किए जाने हेतु आदेशित किया है। उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार 31 मई तक प्रत्येक बैंक, वित्तीय संस्था को किसी संस्था अथवा व्यक्ति अथवा पक्षकार अथवा किसी कारपोरेट निकाय की किसी संपत्ति के संबंध में नीलामी की प्रत्येक कार्य/प्रक्रिया निषेधित किया गया है। न्यायिक अधिष्ठान के न्यायालय के पीठासीन अधिकारीगण को तदनुसार अनुपालन नार्थ निर्देशित किया है। उच्च न्यायालय द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि इस आदेश के परिपालन में अंतरिम आदेश के विस्तार की स्थिति में किसी पक्षकार को इस कार्यवाही से कोई अन्य अनपेक्षित कठिनाई तथा कोई अत्यंतिक प्रकृति का विपरीत प्रभाव उत्पन्न होता है, उस दशा में उक्त पक्षकार/पक्षकारगण सक्षम न्यायालय के समक्ष उचित रीति से प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर समुचित अनुतोष प्राप्त करने के लिए स्वतंत्र होंगे। इस प्रकार प्रस्तुत प्रार्थना-पत्रों पर उक्त वाद से संबंधित समस्त पक्षकारों को सुनवाई का अवसर प्रदान करने के पश्चात इस प्रकार के प्रस्तुत प्रार्थना पत्रों के विचारण एवं निस्तारण में न्यायालय का यह सामान्य निर्देश बाधक नहीं होगा। न्यायालय द्वारा निर्दिष्ट किया गया है कि किसी विशिष्ट वाद/प्रकरण के संबंध में आवश्यक निर्देश शासन एवं उसकी कार्यप्रणाली भी समुचित आवेदन प्रस्तुत करने हेतु स्वतंत्र होगी। न्यायालय के उपरोक्ततानुसार निर्गत निर्देश के अनुपालानार्थ न्यायिक अधिष्ठान के पीठासीन अधिकारी गण जिला शासकीय अधिवक्ता (सिविल) जिला शासकीय अधिवक्ता (क्रिमिनल) के मध्य परिचालित किया जाए। नोडल अधिकारी कंप्यूटर/सिस्टम आफिसर को निर्देशित किया कि जनपद न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट पर सर्वसंबंधित के सूचनार्थ अपलोड किया जाना सुनिश्चित करें। सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देशित किया कि वादकारगण की सुविधा के दृष्टिगत प्रचार के माध्यमों एवं पैरालीगल वालटिंयर के सहयोग से इस आदेश का व्यापक प्रचार-प्रसार करायें।

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