क्लब फुट होने पर जल्दी शुरू कराना चाहिए इलाज : डॉ. अवनीश सिंह | #NayaSaberaNetwork

  • जिला अस्पताल में निःशुल्क किया जा रहा ऑपरेशन
नया सबेरा नेटवर्क
जौनपुर। ऑर्थोसर्जन डॉ. अवनीश सिंह ने कहा कि क्लब फुट का हिंदी में अर्थ है - जन्म से पैर अंदर की ओर मुड़ा होना। इसे टेलिप्स भी कहा जाता है। यह जन्म दोष एक या दोनों पैरों को प्रभावित कर सकता है। जल्दी उपचार से इसे सही करने में मदद मिलती है। डॉक्टर आमतौर पर बिना सर्जरी के क्लब फुट का इलाज कर सकते हैं, हालांकि कभी-कभी बच्चों को सर्जरी की आवश्यकता होती है।
क्लब फुट होने पर जल्दी शुरू कराना चाहिए इलाज : डॉ. अवनीश सिंह | #NayaSaberaNetwork


नया सबेरा डॉट कॉम को उन्होंने बताया कि यदि आपके बच्चे को क्लब फुट है, तो उसका एक या दोनों पैर नीचे की तरफ और अंदर की और मुड़े हुए होते हैं। क्लब फुट बच्चों के लिए दर्दनाक नहीं है, लेकिन अगर इसका इलाज नहीं किया जाता है, तो यह दर्दनाक हो सकता है और जब वे बड़े होते हैं तो उनका चलना मुश्किल हो जाता है। क्लब फुट काफी आम है। भारत में इस पर आंकड़े नहीं हैं के उपचार के लिए लेकिन इंग्लैंड में हर 1,000 में लगभग आम है। भारत में इस पर आंकड़े नहीं हैं लेकिन इंग्लैंड में हर 1,000 में लगभग एक बच्चा क्लब फुट से प्रभावित होता है। इन बच्चों में से लगभग आधे बच्चों में दोनों पैर प्रभावित होते हैं। क्लब फुट के उपचार के लिए स्ट्रेचिंग और कास्टिंग (पोंसेटी मेथड) पोंसेटी मेथड के रूप में जानी जाने वाली यह तकनीक आजकल क्लब फुट के इलाज का मुख्य उपचार है। इसमें धीरे-धीरे आपके बच्चे के पैर को बेहतर स्थिति में लाना शामिल होता है, फिर इस पर एक प्लास्टर चढ़ा दिया जाता है, जिसे कास्ट कहा जाता है। यह हर सप्ताह 5 से 8 सप्ताह तक के लिए दोहराया जाता है। आखिरी कास्ट पूरा होने के बाद, अधिकांश बच्चों को अपने टखने (एचिलीस टेंडन) के पीछे के टेंडन को ढीला करने के लिए एक मामूली ऑपरेशन की आवश्यकता होती है। यह लोकल एनेस्थेटिक का उपयोग करके किया जाता है। यह बच्चे के पैर को और अधिक प्राकृतिक स्थिति में लाने में मदद करता है। टेढ़े मेढ़े पैर का ऑपरेशन जिला अस्पताल में नि:शुल्क किया जा रहा है। ऑपरेशन के पश्चात उक्त बच्चों को नि:शुल्क शूज भी मिलता है।

ऐसे ऑपरेशन के लिए पहले लोगों को महानगरों में जाना पड़ता हैं, और बड़ा खर्च भी वहन करना पड़ता हैं। बताते चले कि डॉ. अवनीश सिंह अब तक लगभग ऐसे 300 बच्चों का ऑपरेशन करके उन्हें ठीक कर चुके है। उन्हें एसजीपीजीआई में सम्मानित भी किया गया है वह एसजीपीजीआइ में बतौर ऑर्थोसर्जन भी अपनी सेवाएं दे चुके है।


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