जिंदगी बेजान हो गया | #NayaSaberaNetwork

जिंदगी बेजान हो गया | #NayaSaberaNetwork


नया सबेरा नेटवर्क

जीवन से बचपन का हाथ और साथ क्या छुटा सांसे घुटने लगी 

और जिंदगी से अपनेपन का एहसास संग मिठास खत्म हो गया

ख्वाबों से भी ज्यादा हसीन और खुबसूरत लगती थी जो जिंदगी

उम्र के इस पड़ाव में जब से आए लगता है जिंदगी बेजान हो गया

 

हर पल मौज मस्ती और ख़ुशीयों के एहसास से लिपटा हुआ लगता था

जिंदगी का वो खुबसूरत मोड़, कही दूर पीछे ही छुट कर रह गया

वक़्त ने जरा समझदार और तजुर्बेकार क्या बना दिया हमें

लगता है जैसे सब कुछ तितर बितर हो बिखर कर रह गया 

 

जब तक नासमझ थे एक अलग जायका होता था जिंदगी में

थोड़ी समझ क्या हुई जिंदगी का सारा स्वाद खत्म हो गया

हर कोई अपना सा लगता था हर पल सपनों सा गुजरता था

जिंदगी की हकीकत से मुलाकात क्या हुई सब बदल गया

 
लेखिका – डॉ सरिता चंद्रा
बालको नगर कोरबा (छ.ग.)

*Ad : Pizza Paradise - Wazidpur Tiraha Jaunpur - Mo. 9519149797, 9670609796*
Ad


*Ad : हड्डी एवं जोड़ रोग विशषेज्ञ डॉ. अवनीश कुमार सिंह की तरफ से नव वर्ष 2021, मकर संक्रान्ति एवं गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं*
Ad

*Ad : बीआरपी इण्टर कालेज जौनपुर के प्रबंधक हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष प्रबंध समिति दिलीप श्रीवास्तव एवं प्रधानाचार्य डॉ. सुभाष सिंह की तरफ से देशवासियों को गणतंत्र दिवस एवं बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं*
Ad


from NayaSabera.com

Comments