राज्यसभा सांसद का एतिहासिक दिन - दलों की सीमाएं मिटाकर दी सियासत की अनूठी मिसाल - हर भारतीय नागरिक की यही चाहत | #NayaSaberaNetwork

राज्यसभा सांसद का एतिहासिक दिन - दलों की सीमाएं मिटाकर दी सियासत की अनूठी मिसाल - हर भारतीय नागरिक की यही चाहत | #NayaSaberaNetwork


नया सबेरा नेटवर्क
हर भारतीय नागरिक चाहेंगे भारतीय राजनीति में पक्ष-विपक्ष के ऐसे मधुर संबंध हो, तो भारत फिर सोने की चिड़िया होगा - एड किशन भावनानी
गोंदिया - भारत की राज्यसभा संसद में मंगलवार दिनांक 9 फरवरी 2021 का नजारा जिस तरह पूरे भारत में नागरिकों ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया पर देखा तो दंग रह गए और खुशी का ठिकाना नहीं रहा और आंखों में चमक आन पड़ी, यह देख करके कि, धुर विरोधी पार्टियों के बहुत बड़े नेता आपस में इस तरह बीते पलों को याद कर नेताओं के आंखों में आंसू झलक पड़े। राज्यसभा सांसद का वह एतिहासिक दिन था, जो दलों की सीमाएं मिटाकर सियासत की अनूठी मिसाल देता था। हर भारतीय नागरिक की भी यही चाहत है के भारतीय राजनीति में पक्ष-विपक्ष के ऐसे मधुर संबंध ही हमेशा हों... वाह क्या बात है! यही प्यार, मोहब्बत, संजीदगी और फीलिंग, करीब-करीब हर नागरिक चाहेगा कि भारतीय राजनीतिक दलों में आपस में हो, तो फिर भारत एक बार फिर सोने की चिड़िया बन जाएगा। हालांकि सत्ता की चाबी जनता के पास ही रहती है और जनता जिस पार्टी को चाहे सत्ता सौंपे, परंतु विपक्षी पार्टीयों को जोरदार ढंग से सत्ताधारी पार्टी का सहयोग कर स्वच्छ व सच्चे मन से सही कार्यों व सही दृष्टिकोण को समझ समर्थन कर कंधे से कंधा मिलाकर, भारत को सोने की चिड़िया फिर बनाने का लक्ष्य रख, संपूर्ण भारतीय नागरिकों को एक अनूठा उपहार देना है। यदि जैसी सोच और भाव मंगलवार दिनांक 9 फरवरी को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और माननीय विपक्षी नेता श्री गुलाम नबी आजाद के बीच देखने को मिला, वैसा सभी राजनैतिक पार्टियों में संसद और विधानसभा पटल पर हो। मामला गुलाम नबी आजाद के राज्यसभा से विदाई का था।माननीय नरेंद्र मोदी ने 2007 के गुजरात के  यात्रियों से भरी एक बस पर जम्मू कश्मीर में ग्रेनेड से हमले का था। हमले का उल्लेख किया और कहा गुजरात के 8 यात्रियों की मृत्यु हुई थी और आजाद साहब ने रात्रि में सबसे पहले मुझे फोन किया और ऐसा दुख झलका कर बात कि जैसे वे आठ व्यक्ति उनके परिवार के व्यक्ति हैं। उस समय प्रणब मुखर्जी जी रक्षा मंत्री थे। मैंने उनसे कहा कि अगर मृतक शरीरों को लाने के लिए सेना का हवाई जहाज मिल जाए, तो उन्होंने कहा कि चिंता मत करिए मैं करता हूं व्यवस्था। लेकिन गुलाम नबी जी उस रात को एयरपोर्ट पर थे, उन्होंने मुझे फोन किया और जैसे अपने परिवार के सदस्य की चिंता करें, वैसी चिंता वो कर रहे थे। यह तारीफ कर प्रधानमंत्री भावुक हुए और रो पड़े और फिर जब गुलाम नबी आजाद कि बोलने की बारी आई तो उन्होंने भी बताया जब वे 2005 से जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री थे तो गुजरात से धार्मिक भावनाओं से जुड़े यात्रियों से भरी एक बस यहां आई थी उस बस पर आतंकवादियों ने ग्रेनेड से हमला किया और उसमें 8 लोगों की मृत्यु हुई उस समय वह एयरपोर्ट पर मृतकों के परिवार वालों से मिले तो वह फफक कर रो पड़े थे, क्योंकि बच्चे रोते हुए मेरी टांगों से लिपट पड़े और मैं बोला - ए खुदा! मैं क्या जवाब दूं इन बच्चों को? उन्होंने कहा मैं पाकिस्तान कभी नहीं गया, पर जब वहां के बारे में सुनता हूं, तो मुझे गौरव महसूस होता है कि हम हिंदुस्तानी मुसलमान हैं उन्होंने कहा, आज हम अल्लाह से, भगवान से, यही दुआ करते हैं कि इस देश से मिलिटेंसी खत्म हो जाए, आतंकवाद खत्म हो जाए। मोदी और शाह से कहा कि कश्मीर को फिर से आशियाना बनाएं।आगे और भी अनेक सकारात्मक बातें कही। वहीं मोदी जी ने भी बहुत ही भावपूर्ण करुणा व आंखों में आंसू झलकाते हुए, गुलाम नबी आजाद को विदाई दी। गुलाम नबी की पीएम मोदी ने तारीफ की। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा, 'मुझे चिंता इस बात की है कि गुलाम नबी जी के बाद जो भी इस पद को संभालेंगे, उनको गुलाम नबी जी से मैच करने में बहुत दिक्कत पड़ेगी। क्योंकि गुलाम नबी जी अपने दल की चिंता करते थे, लेकिन देश और सदन की भी उतनी ही चिंता करते थे।'- प्रधानमंत्री मोदी ने चारों सांसदों को कहा धन्यवाद-प्रधानमंत्री मोदी ने गुलाम नबी आजाद समेत जम्मू कश्मीर के चार राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल खत्म होने पर विदाई भाषण में कहा कि श्रीमान गुलाम नबी आजाद जी, श्रीमान शमशेर सिंह जी, मीर मोहम्मद फैयाज जी, नजीर अहमद जी मैं आप चारों महानुभावों को इस सदन की शोभा बढ़ाने के लिए, आपके अनुभव,आपके ज्ञान का सदन को और देश को लाभ देने के लिए और आपने क्षेत्र की समस्याओं का समाधान के लिए आपके योगदान का धन्यवाद करता हूं। आरपीआई पार्टी में भी आजाद के राज्य में राज्यसभा संसद में बने रहने को जरूरी बताया।सच में अगर हम इस तरह का माहौल संसद के दोनों सदनों में और हर राज्य की विधान परिषद और विधानसभाओं में भी पक्ष विपक्ष के बीच रहे, तो हम सब मिलकर भारत को ऊंचाइयों की बुलंदियों तक ले जा सकते हैं। हर मुद्दे पर पक्ष विपक्ष एक दूसरे को सहयोग कर, उसका समाधान खोजने में भी आपस में मिलकरके कोशिश करें तो भारत में हर समस्या का समाधान आसान हो जाएगा।याने फिर कोई समस्या, यहां खुद ही आना नहीं चाहेगी बस हर राजनीतिक पार्टी को जरूरत है, जनता द्वारा दिए गए जनादेश के सम्मान की और संबंधित पदासीन पार्टी के सरकार का, दिल, तन, मन, स्वच्छ ईमानदारी,और साफगोई से सहयोग करना और एक जिम्मेदार विपक्ष का भी रोल अदा करना है। एक दूसरे की भावनाओं को भी समझना है। जनता का पुरजोर कल्याण और देश के विकास को मुख्य आधार बनाना है। सरकार सहित, हर राजनीतिक दल, पार्टी, दो कदम पीछे हटे, सरकार विपक्ष के उचित मुद्दों को गंभीरता से महत्व दे और सभी दल, समस्या के समाधान को होने में पूरी तरह निष्फल, बिना स्वार्थ के, आगे आए तो निश्चित रूप से भारत विश्व में सर्वश्रेष्ठ देश बन कर उभरेगा। वैसे भी भारत इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी, कुदरती प्राकृतिक खजाना इत्यादि अनेक रुप से बहुत संपन्न है। जरूरत है तो बस सिर्फ इच्छाशक्ति और एक राजनीतिक विचारधारा में तालमेल कर वैसा क्षण लाने की, जो 9 फरवरी 2021 को भारतीय राज्यसभा सांसद में दलों की सीमाएं मिटाकर सियासत की अनूठी मिसाल पेश की जो हर भारतीय नागरिक की चाहत है। पक्ष विपक्ष के ऐसे ही मधुर संबंध संसद के पटल पर समस्याओं को निपटाने और विकास की गाड़ी तीव्र गति से बढ़ाने की हो, तो भारत का फिर से सोने की चिड़िया और विश्व में सर्वश्रेष्ठ महाशक्ति बनना तय है।
लेखक कर विशेषज्ञ, पत्रकार,एड किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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