निर्भय सक्सेना @ नया सवेरा
बरेली। महापौर डाॅ उमेश गौतम ने कहा कि कांग्रेस प्रशासनिक एवं संवैधानिक विषयों को राजनीतिक ढाल बनाकर जनता के बीच भ्रम पैदा कर रही है। लगातार मिल रही हार से बौखलाई कांग्रेस,जी ओल लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करने के बजाय कांग्रेस और उसके नेता जनादेश का अनादर करने की अपनी पुरानी आदत से बाज नहीं आ रहे हैं। महापौर कैंप कार्यालय प्रेस वार्ता में महापौर डाॅ उमेश गौतम ने कहा कि कांग्रेस के तमाम बड़े नेता जान चुके हैं कि संवैधानिक व्यवस्था एवं लोकतान्त्रिक प्रक्रिया में वे अब जनता का विश्वास पुनः हासिल नहीं कर सकते हैं। यही वजह है कि वे पूरे जनतांत्रिक सिस्टम पर भ्रम एवं झूठ फैलाकर, उन्हें ध्वस्त करना चाहते हैं। इसी रणनीति के तहत वे संवैधानिक संस्थाओं पर अनर्गल हमला करते हैं। कांग्रेस जब भी चुनाव हारती है, तब-तब वह चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक संस्थाओं को बदनाम करने की साजिश रचती है। अपनी जमीनी विफलता से जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के झूठे और बेबुनियाद बयान दिए जाते हैं। कांग्रेस को अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक कमजोरियों पर आत्ममंथन करना चाहिए। महापौर डाॅ उमेश गौतम ने कहा कि चुनाव आयोग के संयुक्त बयान से कांग्रेस और विपक्षी इंडी गठबंधन के झूठ का पर्दाफाशः भ्रम और मनगढ़ंत कहानियों की राजनीति पूरी तरह ध्वस्त हुई है। चुनाव आयोग की बैठक और संयुक्त प्रेस नोट से दूध का दूध और पानी का पानी हुआ, कांग्रेस व विपक्ष सिर्फ और सिर्फ झूठ, सनसनी और भ्रम फैलाने का काम कर रहा है। कांग्रेस का झूठ बेनकाब हो गया। तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए एसआईआर समेत सभी फैसले, निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाना विपक्ष की हताशा का प्रतीक है। महापौर डाॅ उमेश गौतम ने कहा कि कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखा पत्र किसी नीतिगत विषय या एसआईआर से संबंधित नहीं था। एक अखबार की रिपोर्ट कोरी कल्पना पर आधारित गढी गई कहानी ही साबित हुई। फॉर्म- 6 के घोषणापत्र को माननीय सर्वाेच्च न्यायालय पहले ही वैध ठहरा चुका है विपक्ष की संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की साजिश फिर नाकाम हुई है। कांग्रेस अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाकर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही है। चुनाव आयोग की स्पष्टता के बाद कांग्रेस के आरोपों की वास्तविकता सामने आ गई है। ऐसे में कांग्रेस को संवैधानिक संस्थाओं पर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय तथ्यों का सम्मान करना चाहिए। जब भी विपक्ष जनता की अदालत में पराजित होता है वह अपनी खीझ और हताशा निकालने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर झूठे आरोप मढ़ने लगता है। निर्वाचन आयोग पर स्पष्ट और कडे़ वक्तव्य ने विपक्ष के सभी और दुर्भावनापर्ण प्रोपेगेंडा की हवा निकाल दी है। महापौर डाॅ उमेश गौतम ने आगे कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों (डाॅ एस एस संधू एवं विवेक जोशी) की 26 सितंबर को बैठक हुई और उसके बाद एक जॉइंट प्रेस स्टेटमेंट चुनाव आयोग की और से जारी किया गया है जिसमें यह स्पष्ट कर दिया गया है कि देशभर में संचालित स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) सहित सभी प्रमुख निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। एक अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित रिपोर्ट पूरी तरह से निराधार और काल्पनिक कहानी प्रतीत होती है। उस रिपोर्ट में न तो कोई ठोस तथ्य था और न ही सच्चाई। विपक्ष लगातार फॉर्म-6 को लेकर जनता में भ्रांति पैदा करने का षड़यंत्र रच रहा था। चुनाव आयोग ने दो-टूक कहा है कि एसआईआर के लिए फॉर्म 6 से संत घोषणापत्र को माननीय सर्वाेच्च न्यायालय ने पूर्ण सही व वैध ठहराया है। विपक्ष केवल अफवाहें फैलाता है जबकि आयोग जमीनी स्तर पर हर मतदाता की भागीदारी सुनिश्चित कर रहा है चाहे वह रैन बसेरों, मजदूरों और बेघरों के लिए विशेष कैंप लगाना हो या छूटे हुए लोगों के घरों पर जाकर बीएलओं द्वारा फॉर्म एकत्र करना हो। राहुल गांधी ने कई बार आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सत्ताधारी दल के दबाव में काम कर रहा है और यह एक कठपुतली बन चुका है। लेकिन हर बार राहुल गाँधी के झूठ को न्याय की अदालत ने खारिज किया है। ये हर बार झूठे आरोप लगाकर भाग जाते हैं।
प्रेसवार्ता में बीजेपी जिलाध्यक्ष बरेली सोमपाल शर्मा, जिलाध्यक्ष आंवला आदेश प्रताप सिंह, महानगर अध्यक्ष अधीर सक्सेना जिला मीडिया प्रभारी अंकित माहेश्वरी, महानगर मीडिया प्रभारी बंटी ठाकुर जिला उपाध्यक्ष राहुल साहू उपस्थित रहे।
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