हरड़ या हर्रे को आपके यहां क्या कहते हैं
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अलग-अलग सरनाम तेरे,
मगर एक ही काम तेरे,
कहीं कटुक्का, अभया है -
कहीं कराका नाम तेरे।
हरड़,हरारा,हिरदा है,
पथ्य, अमृता, हरदा है,
हरीतकी,विजया,शिलिखा
अलले, हर्रे, हिमजा है।
हर दिन सेवन करिए आप,
मिट जाएंगे सारे ताप,
हिरदो बोलो चाहे शिव -
ये हर ले सारे संताप।
मां जैसा जो रखे खयाल,
विटामिनों से मालामाल,
तन-मन को रखती खुशहाल
जग में इस-सी नहीं मिसाल।
डाक्टर को ये रखती दूर,
औषधीय गुण से भरपूर,
इसे मसाला मत समझो,
ये आयुर्वेदिक कोहिनूर।
कब्ज दूर कर देती है,
दर्द कई हर लेती है,
गैस खतम कर दे पल में -
घाव सभी भर देती है।
पाइल्स की बीमारी में,
रामबाण कहलाती है,
सेवन करता जो नियमित
हृदय रोग हर जाती है।
त्वचा चमकने लगती है,
खून साफ करवाती है,
ये जोड़ों का दर्द हरे,
कोलेस्ट्रॉल घटाती है।
प्रकृति से किया एग्रीमेंट,
मिले फायदा परमानेंट,
हरड़ गजब की औषधि है
इसमें एंटीआक्सीडेंट।
त्रिफला चूर्ण बने इससे,
पाचन पूर्ण बने इससे,
भूख बढ़ाती मानव की
तन संपूर्ण बने इससे।
आंतों का वरदान है ये,
सूजन का अवसान है ये,
शूगर को कंट्रोल करे
वैद्यों का भगवान है ये।
दिल मजबूत बनाती है,
गठिया को निपटाती है,
सौ रोगों की दुश्मन ये -
आयुर्वेदिक थाती है।
हर ले टेंशन 'वेट' का,
निर्धन हो या सेठ का,
चूर्ण बनाकर खाओ नित
रामबाण है पेट का।
हर दिन थोड़ा योग करो,
दूर बदन से रोग करो,
मां जीवन भर साथ रहे
हर्रे का उपयोग करो।
सुरेश मिश्र