#JaunpurLive : धनंजय सिंह की उपेक्षा, जौनपुर में पड़ सकती है भाजपा को भारी



जौनपुर। भारतीय जनता पार्टी को पूर्व सांसद तथा जमीन से जुड़े नेता धनंजय सिंह की उपेक्षा भारी पड़ सकती है। धनंजय सिंह जौनपुर के एकमात्र ऐसे नेता है, जो किसी राजनीतिक पार्टी में न रहते हुए भी अपनी ताकत और प्रभाव साबित करते रहे हैं। अगड़ी, पिछड़ी सभी जातियों में समान रूप से लोकप्रिय धनंजय सिंह का जौनपुर की सभी विधानसभा सीटों में अच्छी पकड़ मानी जाती है। अपनी धर्मपत्नी को जिस तरह से उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने में कामयाबी हासिल की, उससे साफ है कि धनंजय सिंह राजनीति के ना सिर्फ सुलझे हुए खिलाड़ी हैं, अपितु पासा पलटने में भी माहिर हैं। भाजपा समर्थकों की लगातार मांग के बावजूद , भारतीय जनता पार्टी ने धनंजय सिंह को पार्टी से जोड़ने का कोई प्रयास नहीं किया। सूत्रों की माने तो भाजपा के जिला के प्रमुख पदाधिकारियों तथा विधायकों को इस बात का डर बना रहा कि यदि धनंजय सिंह को पार्टी से टिकट दिया गया तो वे जीतने के बाद जिला के सभी पदों पर अपने लोगों को ही काबिज करा देंगे। साथ ही सिर्फ उन्हीं की चलेगी। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में जिस तरह से समाजवादी पार्टी के 28 सदस्यों ने उनकी धर्मपत्नी के पक्ष में एकमुश्त वोट किया, उससे साफ जाहिर है कि जौनपुर की सभी विधानसभा सीटों को लेकर धनंजय सिंह तथा समाजवादी पार्टी के बीच अघोषित गुप्त समझौता हुआ है। जौनपुर की सभी विधानसभा सीटों में धनंजय सिंह के समर्थकों की निर्णायक संख्या है। ऐसे में जौनपुर से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों की जीत का सपना ध्वस्त हो सकता है। प्रत्याशियों को टिकट देने में भारतीय जनता पार्टी ने जिस तरह से जनता की भावनाओं को नजरअंदाज करते हुए कई विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी खड़े किए हैं, उससे खुला अंतरकलह परिलक्षित होने लगा है। भारतीय जनता पार्टी को विपक्ष के साथ-साथ, अपने ही पार्टी की विरोधियों तथा धनंजय सिंह की उपेक्षा से नाराज लोगों से भी लड़ना है।


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