12वीं सीबीएसई, स्टेट बोर्ड, परीक्षा रद्द मामला - विद्यार्थियों का पारदर्शी मूल्यांकन, रिजल्ट और विश्वविद्यालयों में प्रवेश के मानकों में संशोधन चुनौतीपूर्ण जवाबदारी | #NayaSaberaNetwork

12वीं सीबीएसई, स्टेट बोर्ड, परीक्षा रद्द मामला - विद्यार्थियों का पारदर्शी मूल्यांकन, रिजल्ट और विश्वविद्यालयों में प्रवेश के मानकों में संशोधन चुनौतीपूर्ण जवाबदारी | #NayaSaberaNetwork


नया सबेरा नेटवर्क
12वीं परीक्षा के रिजल्ट के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर शैक्षणिक एक्सपर्ट कमेटी द्वारा निर्धारित मानकों का पारदर्शिता से मूल्यांकन कर परिणाम घोषित हो - एड किशन भावनानी
गोंदिया - कोविड-19 द्वारा लगातार दूसरे वर्ष भी शिक्षा क्षेत्र के लिए बहुत गंभीर समस्या का निर्माण कर दिया है..। बात अगर वर्तमान में 12 वीं कक्षा की स्टेट बोर्ड और केंद्रीय मध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की परीक्षा की करें तो, 14 अप्रैल को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 12वीं और 10वीं बोर्ड की परीक्षाएं रद्द करने का फैसला लिया गया था, यह फैसला प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हुई बैठक में लिया गया था। जो कि 4 मई से 14 जून के बीच ये परीक्षाएं होनी थीं। क्योंकि कोरोना महामारी की दूसरी लहर की तीव्रता ने दस्तक दे दी और फरवरी माह के अंत से ही इस संबंध में कड़े कदम उठाना शुरू कर दिया गया अनेक राज्यों में लॉकडाउन शुरू कर दिया गया, जो बाद में पूरे राज्य स्तर पर लॉकडाउन को परिवर्तित कर दिया गया जो महाराष्ट्र सहित कुछ राज्यों में 15 जून 2021 तक लागू है...। अब सवाल उठा कि यह परीक्षाएं कब हो ? इस समस्या पर हाई लेवल पर काफी गंभीरता से मंथन चल रहा था। क्योंकि 12वीं की परीक्षाएं विद्यार्थियों के भविष्य की नींव निर्धारित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मानक माना जाता है और डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक सहित अनेक प्रोफेशनल कोर्सेस और विदेशों में पढ़ाई करने की भी नींव 12वीं के रिजल्ट से ही शुरु होती है। अतः गंभीर मंथन लाजमी भी था। परंतु कोरोना महामारी की दूसरी लहर के चलते बच्चों के अभिभावकों का परीक्षाओं के प्रति चिंतित होना भी लाजमी था और परीक्षाएं रद्द करने संबंधी एक याचिका भी सुप्रीम कोर्ट में डाली गई थी जिसकी सुनवाई 3 जून 2021 को निर्धारित है। इस बीच 2 जून 2021 को माननीय प्रधानमंत्री महोदय द्वारा संज्ञान लेकर दिग्गज मंत्रियों,गृह मंत्री, रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री, सूचना प्रसारण मंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय के आला अधिकारियों सहित शिक्षा मंत्रालय के उच्च अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हाई लेवल मीटिंग की, जिसमें केंद्रीय शिक्षण मंत्री  स्वस्थ और एम्स में भर्ती होने के कारण शामिल नहीं हुए थे। मीटिंग संपन्न होने के बाद माननीय प्रधानमंत्री महोदय ने कहा बच्चों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है और सरकार ने ऐलान कर दिया है कि इस साल 10वीं की तर्ज पर सीबीएसई और ICSE की 12वीं की परीक्षाएं भी रद्द की जा रही है। इस दौरान पीएम ने कहा कि कोरोना काल के दौरान हमारे लिए छात्रों की सुरक्षा प्राथमिकता पर है। पीएम ने यह फैसला सरकार के दिग्गज मंत्रियों के साथ हुई एक बैठक के बाद लिया। उल्लेखनीय है कि इस संबंध में 25 मई 2021 तक राज्यों से सुझाव भी मंगाए गए थे जिसमें विदित हो कि पूर्व में इस मुद्दे पर देश के अधिकांश राज्यों ने डेढ़ घंटे की परीक्षा को अपने ही स्कूल में करवाने की प्लानिंग के साथ करवाने पर अपनी सहमति जताई थी। लेकिन दिल्ली महाराष्ट्र के साथ गोवा की सरकार ने परीक्षाएं रद्द करवाने की मांग की थी...। बात अगर हम परीक्षा रद्द करने के फैसले पर प्रतिक्रिया की करें तो विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षाविदों ने इस फैसले का स्वागत किया है और कुछ विद्यार्थियों ने असहमति भी दर्शाई है कि उनकी पिछले 2 सालों से तैयारी चल रही थी वह पानी में चली गई। अर्थात 2 सालों की मेहनत व्यर्थ गई।...बात अगर हम इस फैसले के बाद की स्थिति की करेंतो अभी शिक्षा क्षेत्र के शिक्षाविदों एक्सपर्ट्स, अधिकारियों, स्कूलों कॉलेजों, के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती उभर कर आई है कि अब विद्यार्थियों का पारदर्शी मूल्यांकन कैसे हो। जिस पर प्रतिशत या ग्रेड कैसे घोषित हो, विश्वविद्यालयों में प्रवेश के मानकों में किस तरह संशोधन हो, प्रोफेशनल एंट्रेंस एग्जाम की किस तरह रणनीति हो, इत्यादि अनेक समस्याओं की चुनौती संबंधित अधिकारियों पर है जिसे रणनीतिक रोड मैप बनाकर सुलझाना होगा। जिसके लिए गंभीर मंथन की जरूरत है क्योंकि रणनीति में पारदर्शिता, अभिभावकों, विद्यार्थियों, शिक्षाविदों, में असंतोष पैदा ना हो। अधिकतम लोगों में अनुकूल और सकारात्मक माहौल पैदा करने पर विशेष ध्यान देना होगा। याने अब 12 वीं कक्षा के मूल्यांकन का वैकल्पिक मानक कायम करने का है। नई ग्रेडिंग व्यवस्था में विलंब या भ्रम होने से विद्यार्थियों में असमंजस और तनाव पैदा होगा। इस सिलसिले में भारतीय विश्वविद्यालयों को प्रवेश के मानक में संशोधन को लेकर स्पष्ट निर्देश देना लाजमी होगा ताकि विद्यार्थियों कीयोग्यता और निष्पक्षता से कोई समझौता न हो। विद्यार्थियों का निष्पक्ष और विश्वसनीय शैक्षिक मूल्यांकन का मानक कायम करने का है विद्यार्थियों के वार्षिक प्रदर्शन के आधार पर उनकी योग्यता के अनुरूप ग्रेड या अंक दिए जाने चाहिए। लेकिन बहुत सोच-समझ कर सावधानीसे शैक्षिक मूल्यांकन करना होगा...। बात अगर हम पर्यायवाची फॉर्मूलों की करें तो इसके अनेक वैकल्पिक प्रस्ताव हो सकते हैं। जैसे पिछले 3 वर्षों का एग्रीगेट परफॉर्मेंस,10वीं का रिजल्ट और 12वीं के इंटरनल एसेसमेंट, 11वीं और 12वीं के इंटरनल एसेसमेंट, दसवीं की तरह 12वीं कक्षा की भी ऑब्जेक्टिव क्रेटेरिया तैयार करना यदि कोई विद्यार्थी रिजल्ट से संतुष्ट नहीं है तो। उधर..इस बीच दिल्ली के उपमुख्यमंत्री ने कहा कि उनके मूल्यांकन का जो प्रस्ताव हमने सेंटर गवर्नमेंट को दिया है, वह पूरे देश के लिए लागू हो जाए तो अच्छा है। उन्होंने सुझाव दिया कि सबसे पहले इस बात को मानें कि वह  विद्यार्थी पिछले 12 साल से आपके पास है, अचानक नहीं आया। 12 साल की हिस्ट्री है, सरकार पास कि उसकी कैसी परफॉर्मेंस है। सब कुछ आप उसके बारे में जानते हैं। आपके पास ऑप्शन है कि उसकी पूरी जर्नी को मूल्यांकन करें 10वीं 12वीं इंटरनल एग्जाम प्रैक्टिकल के रिजल्ट उठा लीजिए और उसका मूल्यांकन कार्ड बनाकर दीजिए, यह हो सकता है...। इस विषय पर भी गंभीरता से मंथन करना होगा कि कहीं इस 20- 21 की बेंच पर यह टैग न लगे कि बिना परीक्षा के पास वाली यह बैच है। ..उधर मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, झारखण्ड, इत्यादि राज्यों ने अपनी 12 वीं स्टेट बोर्ड की परीक्षाएं रद्द कर दी है तथा महाराष्ट्र ने कहा है कि राज्य आपत्ती विपदा प्राधिकरण की सलाह पर निर्णय लिया जाएगा। वही राजस्थान बिहार सहित कुछ  प्रदेशों ने सोच-समझकर निर्णय लेने की बात कही है और छत्तीसगढ़ में घर पर ही परीक्षाएं वाला अल्टरनेट शुरू है। अतः उपरोक्त पूरे विवरण का अगर हम विश्लेषण करेंतो 12वीं सीबीएसई स्टेट बोर्ड, परीक्षा रद्द करने के बाद विद्यार्थियों का पारदर्शी मूल्यांकन, रिजल्ट और विश्वविद्यालयों में प्रवेश के मानकों में संशोधन चुनौतीपूर्ण जवाबदारी है तथा 12वीं परीक्षा का पारदर्शी मूल्यांकन कर रिजल्ट के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर शैक्षणिक एक्सपर्ट कमेटी द्वारा निर्धारित मानकों का पारदर्शिता से विश्लेषण कर परिणाम घोषित करने की जरूरत है। 
-संकलनकर्ता लेखक- कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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